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ED Raid in Jabalpur: रीवा-जबलपुर में सड़क ठेकेदारों पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई; हाई क्वालिटी बिल लगाकर खरीदा लो क्वालिटी डामर

जबलपुर: मध्य प्रदेश में सड़कें पहली ही बारिश में क्यों उखड़ जाती हैं? इस सवाल का जवाब अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है। हाल ही में रीवा और जबलपुर में सड़क ठेकेदारों के ठिकानों पर की गई ईडी की छापेमारी में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पता चला है कि सरकारी कंपनियों के नाम पर फर्जी बिल लगाकर सड़कों के निर्माण में घटिया डामर का इस्तेमाल किया जा रहा था।

📑 बिल ‘हाई क्वालिटी’ के, माल ‘लो क्वालिटी’ का

ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि ठेकेदारों ने बिटुमेन (डामर) के बिल तो इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों के नाम पर लगाए, लेकिन वास्तव में डामर लोकल मार्केट से बहुत ही निम्न गुणवत्ता (Low Quality) का खरीदा गया था। 55.60 करोड़ रुपये के ये बिल पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं। यह खेल लंबे समय से एमपीआरडीसी (MPRDC) और ग्रामीण सड़क निर्माण प्राधिकरण की सड़कों में चल रहा था।

🔎 ईडी की रेड में क्या मिला?

प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए जबलपुर और रीवा के दो प्रमुख ठेकेदारों के यहां छापेमारी की। इस कार्रवाई में:

  • 23.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

  • 2.93 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट फ्रीज कर दिया गया।

  • कई महत्वपूर्ण संपत्ति संबंधी दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

❓ क्या अधिकारियों की मिलीभगत थी?

ईडी ने अपनी जांच ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। हालांकि अब तक ठेकेदारों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि बिना सड़क की गुणवत्ता जांचे (Test Report) इन फर्जी बिलों को पास करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या डामर की गुणवत्ता कभी जांची ही नहीं गई?

ED RAID ON ROAD DEVELOPERS REWA JABALPUR