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Garra Bridge Controversy: बालाघाट में बना ‘क्रिकेट बैट’ जैसा रेलवे ओवरब्रिज; गायब हुआ फुटपाथ, मचा हड़कंप

बालाघाट: मध्य प्रदेश में अजीबोगरीब पुलों के निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भोपाल और इंदौर के बाद अब बालाघाट का गर्रा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) सुर्खियों में है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह पुल अपनी बनावट के कारण ‘क्रिकेट बैट’ जैसा दिख रहा है, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या यह है कि इसके डाउन हिस्से से पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ ही गायब है।

🚶‍♂️ गायब हुआ फुटपाथ, राहगीर बेहाल

इस नए-नवेले ब्रिज की सबसे चौंकाने वाली कमी इसके डाउन हिस्से में पैदल चलने वालों के लिए जगह का न होना है। बिना फुटपाथ के बने इस पुल से पैदल गुजरने वाले राहगीरों की सुरक्षा दांव पर लग गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों फूंकने के बाद भी उन्हें एक अधूरा और खतरनाक निर्माण दिया गया है, जो किसी सुविधा के बजाय दुर्घटनाओं को न्योता देता नजर आ रहा है।

📝 SDO का अजीब तर्क: ‘शॉर्टकट’ का लिया सहारा

जब इस खामी के बारे में लोक निर्माण विभाग (PWD) के SDO से पूछा गया, तो उनका बयान और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने तर्क दिया कि यदि वे वन विभाग से जमीन की अनुमति लेने जाते, तो इसमें सालों लग जाते। जनता की परेशानी को देखते हुए, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर बिना फुटपाथ के ही काम पूरा कर दिया गया। यह बयान सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी और ‘जल्दबाजी’ में राहगीरों की सुरक्षा से समझौता करने के दावों पर सवाल खड़े करता है।

⚠️ क्या एमपी बना ‘अजीब ब्रिज’ की प्रयोगशाला?

बालाघाट जिले के लिए पुलों से जुड़ा विवाद नया नहीं है। यहाँ का कोयलारी गांव का ‘X’ आकार का पुल पहले से ही अपनी खतरनाक बनावट के कारण ‘डेथ ब्रिज’ के रूप में कुख्यात है। वहीं, भोपाल का 90-डिग्री टर्न और इंदौर का Z-आकार का ब्रिज पहले ही इंजीनियरिंग की खामियों के उदाहरण बन चुके हैं। जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या मध्य प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर केवल इंजीनियरिंग के अजूबे दिखाने की प्रयोगशाला बनकर रह गया है?