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सुप्रीम कोर्ट ने दो महिलाओं के निर्वासन पर रोक लगायी

असम के गोलपारा डिटेंशन सेंटर में मार्च से बंदी है वे

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने असम में एक फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (विदेशी न्यायाधिकरण) द्वारा विदेशी घोषित की गईं दो महिलाओं के संभावित निर्वासन पर बड़ी राहत देते हुए अस्थायी रोक लगा दी है। ये दोनों महिलाएं, सालेहा खातून और सरभानू बेगम, इस साल मार्च से गोलपारा स्थित नजरबंदी केंद्र (डिटेंशन सेंटर) में बंद हैं।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति वी. मोहना की अवकाश पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक अदालत अगली सुनवाई नहीं करती, तब तक इन महिलाओं को निर्वासित करने की कोई भी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। यह आदेश चार महिलाओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया, जो ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती दे रही हैं, जिसमें उन्हें विदेशी करार दिया गया है।

न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा जताई गई चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई, 2026 को होगी।

क्या है पूरा मामला? सालेहा खातून और सरभानू बेगम को 2018 में अलग-अलग ट्रिब्यूनलों द्वारा विदेशी घोषित किया गया था, जिसे बाद में दिसंबर 2025 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। अपनी याचिका में दोनों महिलाओं ने दावा किया है कि वे भारतीय नागरिक हैं और उनके पास 1971 से पहले के परिवारिक रिकॉर्ड और मतदाता सूची के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय ने उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों को नजरअंदाज किया। उनका तर्क है कि नाम या दस्तावेजों में मामूली विसंगतियों को आधार बनाकर उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया, जो पूरी तरह अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से उन हजारों लोगों के बीच उम्मीद जगी है जो ऐसी ही कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं। फिलहाल, इन दोनों महिलाओं के लिए अगली सुनवाई तक निर्वासन का खतरा टल गया है।