Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Delhi Gymkhana Club: दिल्ली का ऐतिहासिक जिमखाना क्लब होगा बंद! केंद्र सरकार ने 5 जून तक परिसर खाली क... Kanpur ITBP Jawan Case: कानपुर में ITBP जवान की मां का हाथ काटने का मामला; दूसरी जांच में दोनों अस्प... Jaisalmer Dumping Yard: जैसलमेर के बड़ाबाग डंपिंग यार्ड में खुले में मिले मृत गोवंश; लोगों में भारी ... भारतीय अर्थव्यवस्था: सिडबी के स्थापना दिवस पर बोलीं वित्त मंत्री— भारत में डर का माहौल बनाने की कोई ... Iran-US Nuclear Deal: ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते की फाइनल रिपोर्ट लेकर चीन पहुंचे पाक सेना प्रमुख आस... UP Panchayat Chunav: यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म, लेकिन योगी सरकार का बड़ा फैसला— प्रधा... NEET Re-Exam 2026: नीट री-एग्जाम देने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत; इन 3 राज्यों में मिलेगी मुफ्त ब... Gulmarg Gondola News: गुलमर्ग केबल कार में आई तकनीकी खराबी; हवा में फंसे 300 पर्यटक, रेस्क्यू ऑपरेशन... West Bengal Crime: हावड़ा के कथित डॉन आकाश सिंह पर पुलिस का बड़ा एक्शन; सड़कों पर कराया क्राइम सीन र... Twisha Sharma Case: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मामले में बड़ा एक्शन; मृतका की सास गिरीबाला सिंह को...

Palamu Firing Case: पलामू के रामपुर गोलीकांड का मुख्य शूटर गोलू सिंह गिरफ्तार; जमीन विवाद में हुई थी युवक की मौत

पलामू: झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर थाना अंतर्गत रामपुर गांव में बीते 23 मई को हुए सनसनीखेज और वीभत्स गोलीकांड के मामले में स्थानीय पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस खूनी खेल को अंजाम देने वाले दो मुख्य आरोपियों को धर-दबोचा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गोलू सिंह और ब्रह्मदेव सिंह के रूप में हुई है, जो पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र के ही रामपुर गांव के मूल निवासी हैं।

पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया एक खोखा भी साक्ष्य के रूप में बरामद किया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी गोलू सिंह पर ही भीड़ के सामने अंधाधुंध फायरिंग करने का मुख्य आरोप है। गौरतलब है कि 23 मई को रामपुर में एक कीमती जमीन के टुकड़े पर कब्जे के विवाद को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था, जिसके बाद यह फायरिंग की गई थी।

🪵 पहले विधवा महिला का घर ढहाया, फिर बरसाईं अंधाधुंध गोलियां: सकेंद्र चौधरी की हुई थी मौत, 3 अन्य गंभीर

यह खूनी वारदात इतनी बर्बर थी कि जिसने भी सुना, उसके रोंगटे खड़े हो गए। रामपुर गांव में पैतृक जमीन विवाद को लेकर दबंगों ने पहले एक असहाय विधवा महिला मधु चौधरी के पक्के मकान को पूरी तरह से बलपूर्वक ढहा दिया। जब पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया, तो हमलावरों ने हथियारों से लैस होकर खुलेआम फायरिंग शुरू कर दी।

इस अंधाधुंध गोलीबारी की चपेट में आने से सकेंद्र चौधरी नामक एक निर्दोष युवक की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य ग्रामीण गोलियां लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस पूरी घटना को लेकर पीड़ित विधवा मधु चौधरी के लिखित बयान के आधार पर चैनपुर थाने में 17 नामजद और 25 अज्ञात दंगाइयों के खिलाफ हत्या व दंगे की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी।

👮 खुफिया सूचना पर एसपी कपिल चौधरी के निर्देश पर हुई छापेमारी: नामजद और अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पलामू पुलिस मुख्यालय लगातार एक्शन मोड में था। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों से मिली बेहद गोपनीय सूचना के आधार पर रामपुर के संभावित ठिकानों पर रात में घेराबंदी कर छापेमारी की, जिसमें गोलू सिंह और ब्रह्मदेव सिंह को दबोच लिया गया।

मामले की विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए पलामू एसपी (SP) कपिल चौधरी ने बताया कि इस वीभत्स कांड में कुल 42 लोगों (17 नामजद और 25 अज्ञात) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य शूटर सहित दो लोगों को जेल भेज दिया है और इस साजिश में शामिल अन्य सफेदपोशों और अपराधियों का पता लगाने के लिए आगे की सघन छानबीन कर रही है।

🏢 इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे कई गांवों के लोग: पलामू समाहरणालय का किया घेराव, सुरक्षा और फांसी की मांग

इधर, इस जघन्य हत्याकांड और दबंगई के विरोध में रामपुर सहित आसपास के कई गांवों के आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने एकजुट होकर पलामू समाहरणालय (कलेक्टर ऑफिस) का पूरी तरह से घेराव कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मुख्य मांग थी कि घटना में शामिल सभी 17 नामजद आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए, पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा और मुआवजा दिया जाए तथा मुख्य हत्यारे को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फांसी की सजा दिलाई जाए। समाहरणालय परिसर में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया था, जहाँ वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीणों को निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया।