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Indore Water Crisis: इंदौर में पानी के लिए हाहाकार; पुलिस के पैरों में गिरे पार्षद, शहर में जगह-जगह चक्काजाम

इंदौर: सूरज के तीखे तेवर और भीषण गर्मी के बीच मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर शहर में जलसंकट पूरी तरह गहरा गया है। हालत इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही आक्रोशित जनता अब मजबूरन सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रही है। शहर के अलग-अलग प्रमुख चौराहों पर कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने मटके फोड़कर उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम किया। इस दौरान पालदा क्षेत्र में तो कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी उपस्थित पुलिस अधिकारियों के पैरों में गिरकर जनता के लिए पानी की मांग करने लगे। वे तपती सड़क पर ही दंडवत होकर रेंगते हुए अधिकारियों तक पहुंचे और हाथ जोड़कर रोते हुए बोले— सर, इलाके में पानी नहीं है, कैसे भी पानी दिलवा दो… वरना हमारी जनता प्यास से मर जाएगी।”

इस चौतरफा प्रदर्शन और चक्काजाम की वजह से भीषण गर्मी में शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई। दोपहर की तपती धूप और हीटवेव के बीच रास्तों पर फंसे आम मुसाफिरों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों व परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में मौके पर पहुंचे नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और भारी पुलिस बल के पुख्ता आश्वासन तथा टैंकरों की संख्या बढ़ाने के वादे के बाद जैसे-तैसे धरना समाप्त हुआ और स्थिति सामान्य हो सकी।

📊 नगर निगम के अधिकारियों की घोर लापरवाही: समय रहते जल संकट का सही आकलन करने में नाकाम रहा प्रशासन

दरअसल, इस भयावह स्थिति के पीछे नगर निगम के मैदानी अधिकारियों की घोर लापरवाही और सुस्ती साफ तौर पर जिम्मेदार है। अधिकारियों ने समय रहते शहर के जल संकट का सही और व्यावहारिक आकलन ही नहीं किया था। नियमतः प्रतिवर्ष अप्रैल के पहले पखवाड़े (शुरुआती 15 दिनों) में ही आने वाले समर सीजन के जल संकट से निपटने के लिए कंट्रोल रूम और टैंकर सप्लाई की मुस्तैद तैयारी शुरू हो जाती है, लेकिन इस वर्ष नगर निगम में ऐसा कोई भी गंभीर प्रयास देखने को नहीं मिला।

इस वर्ष 15 मई तक जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर पूरी तरह आंख मूंदें सोते रहे। सूरज के तीखे तेवरों ने जब मई के महीने में शहर के ज्यादातर इलाकों के बोरिंग और जल स्रोत पूरी तरह सुखा दिए, तब जाकर जिम्मेदारों की नींद खुली। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा समय रहते जल संकट से निपटने के बैकअप प्लान और प्रयास तेज कर दिए जाते, तो आज इंदौर के हालात इतने भयावह और चिंताजनक नहीं होते जितने कि दिखाई दे रहे हैं।