ईरान युद्ध के भारतीय प्रभाव को पहली बार स्वीकारा
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अर्थव्यवस्था पर असर को स्वीकारा
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मेट्रो और कारपूल से काम चलायें
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संकट में जनता का सहयोग चाहिए
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और उसके कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से किफायत और राष्ट्र सेवा का आह्वान किया है। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और बाधित होती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपनी जीवनशैली में कुछ बड़े बदलाव करने का आग्रह किया है। हैदराबाद में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने इस अपील को राष्ट्रीय कर्तव्य करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसे खरीदने के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।
प्रधानमंत्री ने ईंधन की खपत कम करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने नागरिकों से संकल्प लेने को कहा कि वे पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल बहुत कम करेंगे। जिन शहरों में मेट्रो की सुविधा है, वहां केवल मेट्रो से यात्रा करने की सलाह दी गई। निजी वाहनों के मामले में उन्होंने कारपूल (साझा सवारी) को बढ़ावा देने पर जोर दिया। माल ढुलाई के लिए रेलवे के उपयोग और व्यक्तिगत परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने की अपील की गई।
प्रधानमंत्री ने कोरोना काल के अनुभवों को वर्तमान संकट में ढालने का सुझाव देते हुए कहा, कोरोना के समय हमने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जो प्रणाली विकसित की थी, वह आज के समय की मांग है। यदि हम इसे दोबारा शुरू करते हैं, तो यह राष्ट्रहित में होगा।
इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने कुछ कड़े उपाय भी सुझाए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कम से कम एक साल तक सोने की खरीद से बचें और खाद्य तेल के उपयोग में भी कटौती करें। प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को कुछ समय के लिए स्थगित करने का सुझाव दिया।
मोदी ने जोर देकर कहा, वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल इतने महंगे हो गए हैं कि इन्हें खरीदने में खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाना अब हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। यह अपील स्पष्ट करती है कि सरकार युद्ध के कारण होने वाले आर्थिक झटकों को कम करने के लिए जनता के सहयोग को अनिवार्य मान रही है।