नारी वंदन कार्यक्रम में CM ने राजमाता को किया याद, ‘तीन तलाक’ से मुक्ति और महिला सशक्तिकरण का श्रेय PM मोदी को दिया
भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को राजधानी भोपाल में आयोजिन नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में शामिल हुए. इस दौरान सीएम ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया को याद किया, साथ ही तीन तलाक से मुक्ति और नारी सशक्तिकरण को लेकर विस्तार से चर्चा की.
उन्होंने कहा कि राजपरिवार की रानी अपने सारे सुख भूलकर लोकतंत्र की स्थापना के लिए लड़ीं, जनता के लिए संघर्ष किया और जनता पार्टी के लिए काम करती रहीं. उन्होंने 1967 में बनी संयुक्त विधायक दल सरकार का जिक्र किया और कहा कि तब कैसे कांग्रेस सरकार की नीतियों की वजह से बस्तर के राजा को घर में घुसकर मारने का अपराध किया था. इसके बाद अपने जन बल बलबूते पर विधायकों के समर्थन से राजमाता ने सच्चाई सामने लाने के लिए संघर्ष किया और वो सरकार छोड़ दी थी.
पीएम मोदी की बदौलत मिली तीन तलाक से मुक्ति : सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, ” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बदौलत नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सपना पूरा हुआ है. ये पहली बार नहीं है. इसके पहले भी पीएम मोदी ने नारियों का जीवन अभिशाप बनाने वाले तीन तलाक से बहनों को मुक्ति दिलाई थी.” उन्होंने अहिल्या बाई होल्कर का जिक्र करते हुए कहा, ” किस तरह से उन्होंने मुगल दौर में भी काशी में बाबा विश्वनाथ का धाम बनाया और खास तौर पर तीर्थ स्थलों पर अन्न क्षेत्र और यात्रियों के रुकने का बंदोबस्त किया.” मोहन यादव ने कहा कि जब शासन के सूत्र बहनों के हाथ में आते हैं तो कितने प्रकार से काम होते हैं ऐसे कई उदाहऱण सामने हैं.
16 अप्रैल को एक साथ मनाई जाएगी होली दिवाली : सीएम
मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के इस सम्मेलन में सुमित्रा महाजन और सुषमा स्वराज का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ” प्रदेश के नगरीय निकायों में बहनों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, आज देश की राष्ट्रपति आदिवासी वर्ग से आने वाली द्रोपदी मुर्मू हैं. ये उल्लेखनीय बात है कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मातृशक्ति के लिए बहनों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है.” उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन विधेयक के साथ महिला सशक्तिकरण की मंगलमयी तारीख होगी, देश में होली-दीवाली एक साथ मनेगी.
कृष्णा गौर बोलीं , महिला आरक्षण का सफर आसान नहीं रहा
इस दौरान राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कहा, ” महिला आरक्षण का यह सफर आसान नहीं रहा. यह विधेयक 1996 और 1999 में पारित नहीं हो सका, इसे फिर 2008 में पेश किया गया. वर्ष 2010 में तो यह राज्यसभा में पारित हो गया, लेकिन लोकसभा में अटक गया था. देश की नारी कहती है कि जब नीयत में पवित्रता होती है तो असंभव कार्य भी पूर्ण हो जाते हैं. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन विधेयक सितंबर-2023 में संसद में पेश किया गया, अब इसे लागू करने का समय आ गया है.”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए इस प्रकार के अधिनियम की जरूरत थी. आज लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या मात्र 14 प्रतिशत है. मध्यप्रदेश में मात्र 27 बहनें चुनकर आईं, जो कुल सीटों का 11 प्रतिशत है. आज भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित है.