पवन खेड़ा के बयानों पर कांग्रेस नेता ने प्रतिक्रिया दी
राष्ट्रीय खबर
उत्तर पूर्व संवाददाता
गुवाहाटीः असम विधानसभा चुनाव के करीब आते ही सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुँच गई है। असम कांग्रेस के कद्दावर नेता गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि उनकी पत्नी की कथित विदेशी संपत्तियों के खुलासे ने मुख्यमंत्री को मानसिक रूप से विचलित कर दिया है। गोगोई के अनुसार, सच्चाई जल्द ही सार्वजनिक होगी और आने वाले दिनों में कई नए और चौंकाने वाले विवरण सामने आएंगे।
राहा में एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए गोगोई ने कहा, असम की जनता देख रही है कि पिछले एक हफ्ते से मुख्यमंत्री कितने घबराए हुए हैं। उनकी प्रतिक्रियाओं में एक अजीब सी हताशा और मानसिक बेचैनी झलक रही है, मानो वे अपने ही सर के बाल नोंच रहे हों। गोगोई ने तर्क दिया कि यदि मुख्यमंत्री और उनका परिवार इन आरोपों को लेकर वाकई में बेदाग और आश्वस्त होता, तो वे विपक्षी नेताओं पर पुलिसिया कार्रवाई करने के बजाय धैर्य से काम लेते।
राजनीतिक आरोपों को नैतिक स्तर पर ले जाते हुए गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती दी है कि वे पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद गीता पर हाथ रखकर इन दावों का खंडन करें। गोगोई ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ झूठ का प्रचार करते समय अपनी स्वयं की विदेशी संपत्तियों और गुप्त व्यावसायिक हितों को जनता की नज़रों से छिपा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि ये संपत्तियां ऑफशोर खातों और विदेशी शेल कंपनियों के माध्यम से संचालित की जा रही हैं।
यह विवाद अब केवल चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस ने इस मामले को कानूनी और संवैधानिक मोर्चे पर भी मजबूती से उठाया है। पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उम्मीदवारी को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की गई है।
कांग्रेस का मुख्य आरोप है कि मुख्यमंत्री ने अपने अनिवार्य चुनावी हलफनामे में अपनी पत्नी की विदेशी संपत्तियों और निवेश की जानकारी छिपाई है। नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार को अपने और अपने परिवार की संपत्ति का पूर्ण विवरण देना होता है। कांग्रेस का दावा है कि यह न केवल चुनावी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक शुचिता के साथ भी खिलवाड़ है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, इस मामले ने असम के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह गर्मा दिया है।