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Jiwaji University Scam: जीवाजी यूनिवर्सिटी का कारनामा! बिना परीक्षा और अटेंडेंस के व्यापम के बर्खास्त छात्रों को बांट रही डिग्री

ग्वालियर: व्यापम घोटाले में बर्खास्त 30 छात्रों को जीवाजी विश्वविद्यालय ने बिना परीक्षा बिना अटेंडेंस एमबीबीएस की डिग्रियां दे दी हैं. मामले में विश्वविद्यालय से एसोसिएटेड गजराराजा मेडिकल कॉलेज की छात्र शाखा के प्रभारी और सहायक पर भ्रष्टाचार कर डिग्रियां देने का आरोप लगा है. इस मामले का खुलासा भी व्यापमं घोटाले में बर्खास्त एक छात्र के द्वारा किया गया है. साथ ही एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें एक पूर्व छात्र लाखों रुपए लेकर ये डिग्रियां देने का आरोप लगा रहा है और आरोपी छात्र शाखा का बाबू सफाई देता सुनाई दे रहा है. छात्र ने इसकी शिकायत सीबीआई से लेकर राज्यपाल तक से की है.

क्या है पूरा मामला?

असल में मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज के 150 एमबीबीएस छात्रों के खिलाफ 2006 से 2010 के बीच FIR दर्ज करायी गई थी. इनमें से करीब 30 से 35 छात्राओं को संदिग्ध मानते हुए जांच में लिया गया. जिसके लिए 2017 में न्यू हाई पॉवर कमेटी बनायी गई और उस कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर इन छात्रों में 30 को बर्खास्त कर दिया गया था.

प्रभारी पर 16-16 लाख में डील करने का आरोप

इन्हीं बर्खास्त छात्रों में शामिल छात्र संदीप लहरिया ने आरोप लगाया है कि, “कमेटी की जांच के बाद आज तक बर्खास्त छात्रों को ना तो राहत मिली और ना ही उन्हें बहाल किया गया, लेकिन इन छात्रों को फर्जी तरीके से जीवाजी विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की मिलीभगत से फर्जी डिग्रियां जारी कर दी गई है. इस मामले में छात्र शाखा (यूजी) के प्रभारी व बाबू प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह की बड़ी भूमिका रही है.

संदीप ने एक 13 मिनट का ऑडियो भी जारी किया है, जिसमे संदीप बाबू पर 16-16 लाख रुपए में डिग्री की डीलिंग करने का आरोप लगा रहा है. ऑडियो में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, 5 लोगों से पूर्व में ही डीलिंग हुई और एक अन्य छात्र को डिग्री देने और रिजल्ट निकालने की डील हुई. जबकि इन छात्रों की परीक्षाएं हुई ही नहीं कभी, रिजल्ट भी नहीं निकला.”

बिना राहत बिना बहाली फर्जीवाड़ा कर बांट रहे डिग्री

पूर्व छात्र संदीप लहरिया ने इस मामले की शिकायत जीवाजी विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज के डीन से लेकर राज्यपाल तक से की है. संदीप लहरिया का दावा है की, व्यापम मामले में बर्खास्त छात्रों में वे भी शामिल हैं, लेकिन यहां भ्रष्टाचार कर फर्जी डिग्रियां और रिजल्ट बर्खास्त छात्रों को दी जा रही है. जबकि अब अब तक एक भी छात्र बहाल नहीं हुए हैं. अगर राहत दी गई होती तो वे भी बहाल हो चुके होते.

कैसे चल रहा भ्रष्टाचार का खेल?

संदीप लहरिया ने बताया की, जांच कमेटी द्वारा 2017 में 30-32 एमबीबीएस छात्रों को बर्खास्त किया गया था. इसके बाद से अब तक इनकी बहाली नहीं हुई ना ही निष्कासन रद्द किया गया, ना कॉलेज में वापस बुलाया गया. ये सभी व्यापम में आरोपी छात्र हैं. उसी आधार पर इनका निष्कासन किया गया था, लेकिन पिछले 4 से 5 साल में कॉलेज के छात्र शाखा प्रभारी उनके सहायक और डीन ने मिलकर पुराने छात्रों को जो बर्खास्त है, विश्वविद्यालय से मिलकर वहीं से डिग्रियां छपवाकर उनकी एंट्री कर देना शुरू कर दिया है.

इसके लिए उनसे मोटी रकम हर छात्र से लगभग 18-20 लाख रुपए भी बदले में लिए जा रहे है. बाबू और और उसके सहायक को पता है की ये कौन से छात्र हैं. बाबू प्रशांत चतुर्वेदी उन्हें फोन से संपर्क करता है और उन्हें आश्वासन देता है कि उनकी डिग्री मिल जायेगी. इसके बाद इस रैकेट में जीवाजी विश्वविद्यालय के अधिकारी भी शामिल हैं, वे सभी मिलकर फर्जी डिग्री की एंट्री कर देते हैं और डिग्री उन छात्रों को दे देते हैं. इन छात्रों ने ना कोई अटेंडेंस दी और न ही एग्जाम दिए.”