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बालाघाट के जंगलों में 2 भालुओं की संदिग्ध मौत! शिकार या कुछ और? क्या वन्यजीवों की बढ़ती तादाद ही बन रही है उनकी जान की दुश्मन?

बालाघाट: बालाघाट के जंगलों में वन्यजीवों की बाहुल्यता खतरे में दिख रही है. कभी शिकारियों का शिकार, कभी आपसी संघर्ष, तो कभी विभागीय अमले की उदासीनता भी वन्यजीवों की मौत का कारण बन रही है. बालाघाट के जंगलों से आये दिन सामने आ रही है वन्यजीवों के मौत की खबर.

एक बार फिर दो भालुओं की हुई संदेहास्पद मौत

यूं तो बालाघाट सघन वनों के साथ साथ वन्यजीवों की बाहुल्यता लिए भी जाना जाता है. लेकिन इन दिनों यहां के जंगलों में पाए जाने वाले वन्यप्राणियों की मौत की खबर आम हो गई है, जो कि चिंता का विषय है. जिले में स्थित कान्हा राष्ट्रीय वन उद्यान के साथ साथ जिले के अलग अलग हिस्सों में दूर तक फैले जंगलों के कारण यहां वन्यप्रणियों की बाहुल्यता है. तो क्या इन जंगलों में वन्यजीवों की बाहुल्यता ही मौतों का कारण है या फिर विभागीय उदासीनता. खैर वजह जो भी हो, लेकिन जिस तरह से आये दिन वन्यप्राणियों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं, वो न केवल वन्य प्रेमियों के लिये दुखद है बल्कि सभी के लिए चिंतनीय है.

एक बार फिर वन्यप्रणियों के मौत की खबर जिले के वनांचल क्षेत्र परसवाड़ा से सामने आई है. जहां पर दो भालुओं का क्षत विक्षत शव मिला हैं. मौत का कारण अभी सन्देहास्पद बना हुआ है, कि आखिर इन भालुओं की मौत हुई कैसे?. चूंकि, जिन भालुओं की मौत हुई वे महज दो से तीन माह के बच्चे हैं इसलिये वर्चस्व की लड़ाई या फिर आपसी संघर्ष का सवाल ही उत्पन्न नहीं होता. विभागीय तौर पर फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया जा सका है, हालांकि अलग अलग एंगलों से जांच किये जाने की बात कही जा रही है.

कुमनगांव वृत्त के मोहगांव बीट का मामला

पूरा मामला उत्तर लामता परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले कुमनगांव वृत्त के मोहगांव बीट का है. जहां सूचना के बाद विभागीय अमला घटनास्थल पर पहुंचा और मौका स्थल की सूक्ष्मता से जांच पड़ताल की गई. वहीं पड़ताल के दौरान डॉग स्क्वॉयड की भी मदद ली गई, जिसके बाद क्षत विक्षत शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद भस्मीकरण की कार्यवाही को सम्पन्न किया गया.

मीडिया से चर्चा के दौरान एसडीओ तरुण डहरिया ने बताया कि “हमें बीट में दो भालू के बच्चों के शव होने की सूचना मिली थी. जिसके बाद टीम ने यहां से दो भालुओं के शव को बरामद कर, नियमानुसार उनका शव परीक्षण करवाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया है. मामले में पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही भालुओं की मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन ऐसी आशंका है कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष या किसी बड़े वन्यजीव से इनकी मौत हुई है. चूंकि आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि तीन दिन पहले, उन्होंने जंगल से वन्यजीवों की आवाज सुनी थी. फिलहाल, भालुओं की मौत की जांच की जा रही है.”

इस दौरान एसडीओ तरुण कुमार डहरिया, परिक्षेत्र अधिकारी देवेंद्र रंगारे, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी विजय श्रीवास्तव, सहायक परिक्षेत्राधिकारी कपिल तिवारी, सहित पशुचिकित्सक एवं विभागीय अमला मौजूद रहा.