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LPG Crisis in India: शिरडी से जम्मू तक गैस की भारी किल्लत, सप्लाई चेन ठप होने से बढ़ी मुसीबत; जानें अपने शहर के हालात

ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच देश के कई हिस्सों से एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं. इसी बीच जम्मू में भी गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. दरअसल, स्थिति सिलेंडर की वास्तविक कमी से ज्यादा लोगों की चिंता और जल्दबाजी के कारण पैदा होती दिखाई दे रही है. होम डिलीवरी बंद होने के बाद उपभोक्ता सीधे गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं और अपने सिलेंडर भरवाने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं.

जब जम्मू की एक गैस एजेंसी के बाहर पहुंची तो वहां लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली. कई उपभोक्ताओं का कहना था कि होम डिलीवरी बंद किए जाने के कारण उन्हें अपना कामकाज छोड़कर घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कतारों में ऐसे उपभोक्ता भी शामिल हैं जिनके घरों में पहले से सिलेंडर मौजूद हैं, लेकिन वे एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सिलेंडर भरवाने के लिए लाइन में लगे हुए हैं. इससे उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें वास्तव में गैस की जरूरत है.

उपभोक्ताओं को हो रही है दिक्कत

वहीं गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि सिलेंडर की कोई कमी नहीं है. उनके अनुसार, हर दिन एक एजेंसी से 300 से ज्यादा सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है. इसके बावजूद लोग अतिरिक्त सिलेंडर भरवाने के लिए एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं ताकि आने वाले दिनों में उन्हें गैस की कमी का सामना न करना पड़े. हालांकि, मौजूदा हालात में लोगों की चिंता और अफवाहों के चलते एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ती जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

मुंबई में क्या है स्थिति?

मुंबई में एलपीजी गैस की कमी का असर अब शहर के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. गैस की अनियमित आपूर्ति और सिलेंडर की किल्लत के कारण मुंबई के कई छोटे-बड़े होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. वहीं कुछ होटल और रेस्टोरेंट ऐसे भी हैं जिन्होंने हालात से निपटने के लिए अब पारंपरिक तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं और चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है.

मुंबई के माटुंगा इलाके में स्थित मशहूर साउथ इंडियन फूड स्टॉल Manis Cafe ने भी एलपीजी की कमी के बीच अपने काम को जारी रखने के लिए नया रास्ता अपनाया है. होटल प्रबंधन ने अपने बेस किचन में चूल्हे जलाकर राइस, सांभर और दूसरे जरूरी दक्षिण भारतीय व्यंजन बनाना शुरू कर दिया है, ताकि ग्राहकों को भोजन की आपूर्ति जारी रखी जा सके.

गैस सिलेंडर की किल्लत के चलते जहां कई होटल बंद हैं, वहीं कुछ प्रतिष्ठान अब लकड़ी और पारंपरिक ईंधन का सहारा लेकर अपना काम चला रहे हैं. इससे साफ है कि एलपीजी संकट का असर अब सीधे तौर पर खानपान के व्यवसाय पर पड़ रहा है.

प्रसाद तैयार करने की प्रक्रिया हो रही प्रभावित

महाराष्ट्र में एलपीजी की कमी का असर अब शिरडी के साईबाबा संस्थान पर भी दिखाई देने लगा है. गैस की बचत करने के लिए साई संस्थान ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रसाद वितरण में बदलाव किया है. अब साई भक्तों को केवल एक ही लड्डू प्रसाद पैकेट दिया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, एक भक्त को सिर्फ एक ही लड्डू पैकेट देने का निर्णय लिया गया है ताकि गैस के उपयोग में कटौती की जा सके. साई संस्थान में रोजाना करीब 45 हजार लड्डू प्रसाद पैकेट की बिक्री होती है, जबकि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को रोज लगभग 50 हजार बूंदी प्रसाद पैकेट मुफ्त वितरित किए जाते हैं. गैस की टंचाई के कारण प्रसाद तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है, जिससे साई संस्थान को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.

लखनऊ में इसका असर क्या?

लखनऊ के इंद्रा नगर में गैस गोदाम के पास एक खाली प्लॉट में गैस सिलिंडर के लिये सुबह चार बजे से लाइन में खड़ी राखी अवस्थी जब अपनी परेशानी बता रही थी तो उसका गला भर गया, वो रो पड़ी. चार छोटे बच्चों को घर पर छोड़ कर एक मां सिलिंडर के लाइन में खड़ी हो और लगातार दूसरे दिन चार घंटे केआर इंतजार के बाद अचानक सुबह 9 बजे पता चले कि गाड़ी नहीं आएगी तो इंसान ऐसे ही असहाय महसूस करता है.

यह परेशानी केवल राखी अवस्थी की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के हजारों लोगों के सामने है. एक तरफ प्रशासन के दावे हैं जहां कहा जा रहा है कि रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं है दो दूसरी तरफ ये सच्ची तस्वीरें जो सवाल खड़ा करती हैं, यदि किल्लत नहीं है तो फिर एक असहाय महिला अपने छोटे बच्चों को अकेला छोड़ कर लगातार दूसरे दिन पांच घंटे तक खुले आसमान के नीचे धूप और गर्मी के बीच लाइन में क्यों है?