Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Amarnath Yatra 2026: 15 अप्रैल से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन, 3 जुलाई से पहली यात्रा; जानें कौन सा रूट आप... Moradabad: मुरादाबाद की 'लेडी विलेन' 3 साल बाद गिरफ्तार, मासूम चेहरे के पीछे छिपा था खौफनाक राज; पति... Noida Traffic Alert: नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, दिल्ली-गाजियाबाद की सड़कें जाम; कई किलोमीटर... Rath Yatra Controversy: जगन्नाथ मंदिर और इस्कॉन के बीच क्यों ठनी? जानें रथ यात्रा की तारीखों को लेकर... West Bengal: सड़क-बिजली नहीं, भारतीय पहचान साबित करने का है ये चुनाव; 6 परिवारों की रूह कंपा देने वा... मंडप में सेहरा बांधकर पहुंचे दो दूल्हे, दुल्हन हो गई कन्फ्यूज कि किससे करे शादी? फिर जो हुआ वो कर दे... Weather Update: दिल्ली-NCR में सताएगी गर्मी, हिमाचल-उत्तराखंड में बारिश का अलर्ट; जानें यूपी-बिहार क... Noida: सैलरी को लेकर नोएडा में मजदूरों का भारी बवाल, पुलिस पर पथराव और आगजनी; हालात काबू करने के लिए... आयुष्मान योजना की असफलता पर बलतेज पन्नू का मुख्यमंत्री नायब सैनी पर हमला CM Mohan Yadav: लीला साहू के बाद अब मीना साकेत ने सीएम मोहन यादव से की बड़ी मांग, बोलीं- 'अस्पताल में...

Crime News Bihar: एक क्लिक पर बुक होती थीं लड़कियां, बिहार पुलिस ने उजागर किया मानव तस्करी का ‘मामी-मौसी’ नेटवर्क

चैट में आका अपने एजेंट को लड़की के शरीर को इंच-टेप से नापने के निर्देश देता है. यहां तक कि लड़की के पीरियड्स (मासिक धर्म) की तारीख तक का हिसाब रखा जाता है. एक लड़की को जाल में फंसाकर आका तक पहुंचाने के बदले एजेंट को 50,000 से 1,00,000 रुपये तक दिए जाते हैं.

दिल्ली में ‘मामी’ तो मुंबई में ‘मौसी’

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए यह सिंडिकेट कोडवर्ड का इस्तेमाल करता है. अलग-अलग शहरों के गैंग लीडर्स के नाम रिश्तों के आधार पर रखे गए हैं. दिल्ली के लिए मामी, मुंबई के लिए मौसी, हैदराबाद के लिए बुआ और लुधियाना के लिए कोडवर्ड होता था दीदी,

कैसे फंसाते हैं जाल में?

रक्सौल डीएसपी मनीष आनंद के मुताबिक, तस्कर सोशल मीडिया और प्रेम प्रसंग का सहारा लेते हैं. पहले भोली-भाली लड़कियों को फंसाया जाता है, फिर उनका अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है. इसके बाद उन्हें अच्छी नौकरी या शादी का झांसा देकर बॉर्डर पार या बड़े शहरों में बेच दिया जाता है.

बॉडी ऑर्गन बेचने के लिए भी हो रहा इस्तेमाल

मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाले एनजीओ ‘स्वच्छ रक्सौल’ के संचालक रंजीत सिंह ने बताया कि इन लड़कियों का इस्तेमाल सिर्फ देह व्यापार में ही नहीं, बल्कि अवैध अंग प्रत्यारोपण के लिए भी किया जाता है. रंजीत सिंह अब तक 600 से ज्यादा लड़कियों को इस नरक से बचा चुके हैं. वहीं, रक्सौल पुलिस ने भी अब तक 100 से अधिक लड़कियों का रेस्क्यू किया है.