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यह मामला हमेशा के लिए नहीं चल सकता

सोनम वांगचुक की पत्नी ने शीर्ष अदालत में की गुहार

  • लद्दाख की मांगें की तो गिरफ्तार हुए

  • यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है

  • हिरासत बढ़ाने का कोई आधार नहीं है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: लद्दाख के प्रमुख सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की निवारक हिरासत को चुनौती देते हुए उनकी पत्नी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से पेश दलीलों में स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और यह मामला हमेशा के लिए नहीं चल सकता।

सोनम वांगचुक, जो लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलो दिल्ली पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे, उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद से ही कानूनी विवाद बना हुआ है। उनकी पत्नी ने अपनी याचिका में महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं। याचिका में कहा गया कि वांगचुक केवल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने दिल्ली आ रहे थे।

उन्हें हिरासत में रखना अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है। कोर्ट में दलील दी गई कि प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्था का हवाला देकर इस कानूनी प्रक्रिया को लंबा खींच रहा है। उनकी पत्नी ने जोर देकर कहा कि हिरासत की अवधि को बिना किसी ठोस कानूनी आधार के बार-बार बढ़ाना न्यायसंगत नहीं है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि वांगचुक को रिहा किया जाए ताकि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकें।

सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों को दिल्ली की सीमा पर तब हिरासत में लिया गया था, जब वे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पदयात्रा कर रहे थे। प्रशासन ने उस समय दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू होने और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था। पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था कि आखिर किस आधार पर और कितने समय तक इन्हें हिरासत में रखा जा सकता है। अब वांगचुक के परिवार ने न्यायालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और अंतिम फैसले की मांग की है, ताकि उनकी हिरासत को और अधिक न बढ़ाया जा सके।