Maharashtra Politics: BJP पर भड़की उद्धव ठाकरे की शिवसेना! कहा- चुनाव के लिए टीपू सुल्तान को वापस जिंदा किया जा रहा
महाराष्ट्र इन दिनों मालेगांव महापालिका में टीपू सुल्तान की फोटो को लेकर बवाल मचा हुआ है. तमाम हिंदू संगठनों के साथ-साथ शिवसेना ने भी इसको लेकर अपना विरोध जाहिर किया है. शिवसेना (UBT) ने अपने मुखपत्र सामना टीपू सुल्तान के विवाद पर BJP पर निशाना साधा है. इसमें कहा गया कि औरंगजेब और अफजल खान की तरह अब टीपू सुल्तान को कब्र से वापस जिंदा किया जा रहा है.
सामना में लिखा गया कि औरंगजेब और अफजल खान की तरह मैसूर का टीपू सुल्तान एक बार फिर कब्र से बाहर आ गया है. मालेगांव महानगरपालिका के उप महापौर शान-ए-हिंद के हॉल में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया, लेकिन विवाद बढ़ने से पहले ही टीपू की तस्वीर दीवार से हटा दी गई.
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा की तरह इस पूरे मामले को राजनीतिक और हिंदू-मुस्लिम रंग दे दिया. इस रंग को कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने और भी दूषित कर दिया.
शिवाजी महाराज से टीपू सुल्तान की तुलना निंदनीय
सपकाल ने कहा था कि टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष माना जाना चाहिए. इस पर सामाना में लिखा कि सपकाल ने यह कहकर कि टीपू और छत्रपति का काम बराबर था. बीजेपी के हाथ उस्तरा दे दिया. असल में यह तुलना की ही नहीं जा सकती है. देवेंद्र फडणवीस और उनकी पार्टी ने इस पर कांग्रेस की जमकर आलोचना की. कांग्रेस की नैतिकता, शर्म और प्रतिष्ठा की सरेआम इज्जत निकाल दी.
आगे कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि सपकाल द्वारा टीपू जैसे व्यक्ति की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से करना निंदनीय है. छत्रपति शिवाजी महाराज को टीपू के बराबर मानना निंदनीय ही है. यह सच है कि बीजेपी के लोग टीपू सुल्तान के नाम से अपनी सहूलियत के अनुसार खुश/नाराज होते हैं. इसी टीपू सुल्तान को पाकिस्तान में नायक माना जाता है और उसी पाकिस्तान के साथ भारत क्रिकेट मैच खेल रहा है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि फडणवीस व भाजपा को यह निंदनीय नहीं लगता.
टीपू सुल्तान को लेकर क्या लिखा?
संपादकीय में टीपू सुल्तान के इतिहास को लेकर कहा गया, “टीपू सुल्तान कौन था, वह क्या था? इस इतिहास पर चर्चा करने का कोई फायदा नहीं. वह मैसूर का राजा था. उसके पिता हैदर अली भी राजा थे. उसने अंग्रेजों से युद्ध किया. वह एक योद्धा था, लेकिन वह अपने राज्य और साम्राज्य को बचाने के लिए युद्ध लड़ रहा था. छत्रपति शिवाजी महाराज ऐसे नहीं थे.
आगे लिखा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगल आक्रमण को रोकने के लिए हिंदवी स्वराज की शून्य से स्थापना की. उन्होंने अपना राज बनाया. टीपू को यह राज्य विरासत में मिला. छत्रपति ने स्वराज के शत्रुओं को इसी मिट्टी में दफना दिया. 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में उनकी मृत्यु हुई. कुछ इतिहासकार उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला पहला स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं.”
संपादकीय में लिखा कि टीपू पर हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन और अत्याचार के आरोप लगते रहे हैं, जिससे विवाद भड़कता है. साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज की स्थापना को अद्वितीय बताते हुए कहा गया कि उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती. आगे लिखा गया कि राजनीतिक दल समय-समय पर टीपू सुल्तान के नाम का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए करते रहे हैं. कभी उनका महिमामंडन किया जाता है, तो कभी विरोध किया जाता है.