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जनरल नरवणे की चर्चा कर राहुल ने फिर घेरा

नेता प्रतिपक्ष के तेवर से सदन में पूरी सरकार परेशान

  • तीन दिनों से चर्चा के केंद्र में है विषय

  • मोदी पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप

  • पुस्तक के प्रकाशन पर सरकारी रोक लगी है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संसद परिसर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध एक नए शिखर पर पहुँच गया है। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह पूरा विवाद 2020 के भारत-चीन (गलवान) संघर्ष के दौरान लिए गए निर्णयों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

राहुल गांधी ने मीडिया के सामने एक प्रति दिखाते हुए कहा कि सरकार और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस पुस्तक के अस्तित्व से इनकार कर रहे हैं, लेकिन यह हकीकत में मौजूद है। संस्मरण का हवाला देते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि जब चीनी टैंक भारतीय सीमा में घुसे, तब जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और एनएसए से संपर्क किया, लेकिन उन्हें स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले। राहुल के अनुसार, प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारी लेने के बजाय सेना प्रमुख से कहा, जो उचित समझो वो करो। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री द्वारा अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना और सेना को अकेला छोड़ना बताया। विपक्ष के नेता ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा में इस विषय पर बोलने और संस्मरण से उद्धृत करने से रोका जा रहा है।

यह मुद्दा केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद की कार्यवाही पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा। मंगलवार को राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस के 7 और माकपा के 1 सांसद को बजट सत्र की शेष अवधि (2 अप्रैल तक) के लिए निलंबित कर दिया गया।

राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष की आवाज दबाना और लोकतंत्र पर धब्बा करार दिया है।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी पिछले साल से ही चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, इसके कुछ अंशों में 2020 के पूर्वी लद्दाख संकट के दौरान राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी का संकेत दिया गया था। रक्षा मंत्रालय ने इस पुस्तक के प्रकाशन को लेकर कुछ आपत्तियां जताई थीं, जिसके कारण इसका विमोचन फिलहाल रुका हुआ है। विपक्ष का मानना है कि यह संस्मरण उस समय की जमीनी हकीकत को बयां करता है जिसे सरकार सार्वजनिक नहीं होने देना चाहती।