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गाजा के बोर्ड ऑफ पीस में भारत को न्योता

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी जानकारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत के बढ़ते कद को एक और बड़ी मान्यता मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के उद्देश्य से गठित बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए भारत को आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया है।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस निमंत्रण की पुष्टि करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेषित किया है। यह कदम न केवल ट्रंप की शांति योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है, बल्कि यह वर्तमान भू-राजनीतिक समीकरणों में भारत को एक अपरिहार्य वैश्विक खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करता है।

राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के अनुसार, इस बोर्ड का मुख्य कार्य गाजा में स्थायी शांति बहाल करना और वहां एक प्रभावी शासन प्रणाली को समर्थन देना है। यह बोर्ड न केवल सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए काम करेगा, बल्कि युद्ध के बाद गाजा में स्थिरता और आर्थिक समृद्धि लाने की रणनीति भी तैयार करेगा। राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया एक्स पर निमंत्रण पत्र साझा करते हुए लिखा कि यह बोर्ड क्षेत्र में शासन को मजबूत करने और विकास के नए द्वार खोलने में मदद करेगा।

अमेरिका द्वारा भारत को इस बोर्ड में आमंत्रित करना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:

संतुलित दृष्टिकोण: भारत के इज़राइल और फिलिस्तीन, दोनों के साथ ऐतिहासिक और मजबूत संबंध हैं। भारत का संतुलित रुख उसे एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनाता है। भारत ने गाजा में निरंतर मानवीय सहायता भेजी है, जिससे वहां के लोगों के बीच उसकी छवि एक मददगार देश की रही है।

वाशिंगटन चाहता है कि गाजा के पुनर्निर्माण और शांति प्रक्रिया में भारत जैसी लोकतांत्रिक शक्ति की सक्रिय भूमिका हो, ताकि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी एक शक्ति का एकाधिकार न रहे।

यदि भारत इस निमंत्रण को स्वीकार करता है और बोर्ड में शामिल होता है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में भारत के प्रत्यक्ष प्रवेश का संकेत होगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पहले भी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान शांति की बात कही है, और अब गाजा के मामले में भारत की उपस्थिति इस वैश्विक संकट के समाधान में एक निर्णायक मोड़ ला सकती है। पूरी दुनिया अब नई दिल्ली के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रही है, जो यह तय करेगा कि भारत इस शांति मिशन में कितनी सक्रिय भूमिका निभाएगा।