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खजुराहो से विदेशी सैलानियों का मोहभंग! मंडला और दमोह में फीका रहा नए साल का जश्न

छतरपुर: नए साल पर जहां देश और मध्य प्रदेश के ज्यादातर मंदिर और टूरिस्ट प्लेस सैलानियों से खचाखच भरे रहे है. वहीं कई जगह एसी भी रही हैं, जहां पिछले वर्षों की अपेक्षा पर्यटक कम संख्या में पहुंचे है. विश्व पर्यटन नगरी के नाम से मशहूर खजुराहो में अपेक्षित रौनक कम दिखाई दी. साल 2026 के पहले दिन 1 जनवरी को देसी सैलानियों की अच्छी खासी भीड़ दिखी, लेकिन विदेशी पर्यटक कम दिखे. 31 दिसंबर और 1 जनवरी को जहां खजुराहो विदेशी पर्यटकों से खचाखच भर रहता था, पैर रखने तक की जगह नहीं रहती थी. वहीं इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखी.

सिर्फ 370 विदेशी मेहमान पहुंचे खजुराहो

इस साल खजुराहो में विदेशी पर्यटकों के कम आने से होटल कारोबारियों को अच्छा खासा नुकसान होने की उम्मीद है. अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह में 10,300 भारतीय पर्यटक पहुंचे, जबकि विदेशी सैलानियों की संख्या मात्र 370 रही. विदेशी सैलानियों का यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है. यह आंकड़े चिंताजनक है. इस वजह से बड़े होटल और महंगे कपड़ों के शोरूम खाली पड़े रहे हैं.

नए साल पर कारोबारियों को लगा झटका

अपनी तीसरी वर्षगांठ मना रहा आदिवर्त संग्रहालय में भी यहीं स्थिति देखने को मिली. शाम 6 बजे तक यहां 1100 भारतीय सैलानी पहुंचे, लेकिन विदेशी पर्यटकों की संख्या केवल 5 पर सिमट गई. ये आंकड़े खजुराहो में विदेशी पर्यटकों की लगातार घटती संख्या को दर्शाते हैं. बाजार में केवल नाश्ते की दुकानों पर थोड़ी बहुत भीड़ दिखाई दी, ज्यादातर दुकानदार पूरे दिख पर्यटकों का इंतजार करते रहे है. जिससे स्थानीय बड़े व्यापारियों को भारी नुकसान होने का अनुमान जताया जा रहा है.

प्रचार-प्रसार न होने से पर्यटकों में आई कमी

खजुराहो में नए साल पर पर्यटकों की घटी संख्या से टूरिस्ट बिजनेस जुड़े लोग बहुत चिंतित हैं. ऐसे ही एक समाजसेवी और कारोबारी परशुराम तिवारी है. उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहना है कि “खजुराहो अब अपनी पहचान खोने की कगार पर है. इंटरनेशनल लेवल पर यहां का सही ढंग से प्रचार-प्रसार नहीं किया जा रहा है, जिस वजह से लोगों को यहां की खूबसूरती के बारे में पता ही नहीं चल पा रहा है. यहीं वजह है कि नए पर्यटक यहां नहीं आ रहे हैं.

बागेश्वर धाम की ओर आकर्षित हो रहे सैलानी

तिवारी के अनुसार, ‘वंदे भारत’ ट्रेन से आने वाले पर्यटक अक्सर बागेश्वर धाम की ओर आकर्षित होते हैं और उन्हें खजुराहो के ऐतिहासिक महत्व की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती. उन्होंने यह भी बताया कि पर्यटकों के ठहरने आदि की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं, जिसके कारण सैलानी केवल एक या दो घंटे के लिए ही रुकते हैं. इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ा है. बड़े होटल और कपड़े के शोरूम खाली पड़े हैं.

कान्हा नेशनल पार्क आए पर्यटक हुए निराश

नए साल पर पर्यटकों से केवल खजुराहो भर महरूम नहीं रहा है. मंडला के कान्हा नेशनल पार्क में भी कम संख्या में टूरिस्टों पहुंचे हैं. यहां टूरिस्टों में गिरावट को नई गाइडलाइन से जोड़कर देखा जा रहा है. मानों नई गाइडलाइन ने पर्यटकों की खुशियों पर ब्रेक लगा दिया है. कान्हा नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा नाइट सफारी को बंद कर दिया गया है. जिसका सीधा असर नए साल पर यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या पर देखने को मिला है.

कैमरा और मोबाइल के उपयोग पर लगी रोक

नए गाइडलाइन के अनुसार अब पर्यटक सफारी के दौरान न तो कैमरे का उपयोग कर सकेंगे और न ही मोबाइल फोन से फोटो या वीडियो बना सकेंगे. जैसे ही यह जानकारी सामने आई, पर्यटक हैरान रह गए. प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय कोर्ट के आदेश के तहत लिया गया है. वन्यजीवों की सुरक्षा, उनकी प्राकृतिक गतिविधियों में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसी उद्देश्य से कैमरा और मोबाइल के उपयोग पर रोक लगाई गई है.

नाइट सफरी बंद होने से मोह हुआ भंग

गाइड यूनियन के सदस्य यादव ने बताया, “नई गाइडलाइन जारी के होने के बाद से जंगल सफारी के लिए आने वाले टूरिस्टों की संख्या में कमी देखी जा रही है. जहां पहले 70-80 गाड़ियां आती थीं, वहां अब 40 से 50 गाड़िया पहुंच रहीं है. नए साल पर भी इसका असर देखने को मिला है. नाइट सफारी के बंद होने के कारण टाइगर रिजर्वों में इसका बहुत ज्यादा असर पड़ा हुआ है. जो पर्यटक सुबह की सफारी में नहीं जा पाते थे, वो रात्रि कालीन सफारी का आनंद लेते थे. लेकिन अब नहीं कर सकेंगे.”

नए नियम के चलते नहीं पहुंच रहे पर्यटक

यहीं वजह है कि दमोह के संग्रामपुर स्थित सिंघौरगढ़, निदान बॉर्डर फॉल, भैंसा घाट जैसे टूरिस्टों प्लेस पर जाने वाले लोग मायूस होकर लौट रहे हैं. यह पूरा इलाका रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है और नए नियम लागू होने से पर्यटक अब इन इलाकों में फोटो और वीडियोग्राफी आदि नहीं कर सकते हैं. नए साल पर यहां जबलपुर, कटनी और दमोह सहित विभिन्न जिलों के लोग घूमने फिरने और पिकनिक मनाने पहुंचते थे. इन्हीं सब कारणों के चलते इस साल यहां नए साल पर पहले की अपेक्षा कम संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं.