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“गाजियाबाद मर्डर मिस्ट्री: जिस शूटर ने जवान को मारा, वह पहले कर चुका है पिता समेत 8 लोगों का कत्ल”

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रिटायर्ड एयर फोर्स कर्मी की हत्या मामले में नया खुलासा हुआ है. जिस सुपारी किलर अरविंद ने रिटायर्ड एयर फोर्स कर्मी योगेश कुमार की हत्या की, उसकी पहले से ही आपराधिक हिस्ट्री रही है. एसपी सिद्धार्थ गौतम के मुताबिक, अरविंद के पिता को एक ही परिवार के 8 लोगों की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास सजा मिली थी. हत्या में अरविंद ने भी पिता का साथ दिया था.

एसपी ने बताया- उस वक्त अरविंद नाबालिग था. इस कारण उसे कम सजा मिली थी. उसे बाल सुधार गृह भेजा गया था. वो 12वीं पास है. वहीं, उसके पिता को आठ हत्याओं के आरोप में कोर्ट से मृत्यु दंड मिला था, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी अरविंद बुलंदशहर जिले का रहने वाला है. पारिवारिक विवाद के कारण उसने अपने पिता के साथ मिलकर बचपन में ही आठ लोगों की हत्या करने में पिता का साथ दिया था. यह हत्याकांड 2008 में बुलंदशहर के बरारी गांव में घटित हुआ था.

बुलंदशहर में हुए इस हत्याकांड के बाद अरविंद अपनी पत्नी सहित गाजियाबाद के लोनी में आकर रहने लगा था. उसके पड़ोस में ही रिटायर्ड एयर फोर्स कर्मी योगेश का परिवार रहता था. अरविंद का योगेश के दोनों बेटों से काफी मिलना जुलना था. जबकि, मृतक योगेश की पत्नी भी अपने पति के द्वारा प्रताड़ित होने पर अपना दुख रोकर आरोपी को सुनाती थी. ऐसे में मृतक के दोनों बेटों से एक दिन उनकी ही छत पर शराब पीने के दौरान अरविंद ने उनके पिता को रास्ते से हटाने की साजिश रची. फिर इस साजिश में अरविंद ने अपने यूपी पुलिस में कार्यरत जीजा को शामिल किया जो छुट्टियों पर आया हुआ था. योगेश की हत्या की हत्या के एवज में ₹500000 की सुपारी अरविंद ने ली थी.

आरोपी अरविंद ने पुलिस को यह भी जानकारी दी कि वो भी योगेश से काफी चिढ़ता था. क्योंकि योगेश अक्सर उसके शराब पीने और स्ट्रीट डॉग को दूध पिलाने और खाना खिलाने से नाराज रहता था. इतना ही नहीं योगेश उन सभी स्ट्रीट डॉग को मारा पीटा करता था, जिन्हें अरविंद दूध पिलाता और खाना खिलाता था. लेकिन तब अरविंद खून का घूंट पीकर रह जाता था क्योंकि योगेश उनका पड़ोसी था.

26 दिसंबर के दिन योगेश को मार दी गोली

अरविंद को अपना बदला लेने का मौका मृतक के दोनों बेटों ने दे दिया. दोनों बेटों ने पिता की हत्या के लिए अरविंद को ₹500000 की सुपारी दी थी. योगेश के बेटे के मुताबिक उनके पिता रिटायरमेंट के बाद मिली रकम को अपनी महिला मित्रों पर लूट रहे थे. और जिस घर में वह रहते थे सभी को वहां से निकल जाने के लिए कहते थे. फिर योजना के तहत नाई की दुकान के पास 26 दिसंबर को योगेश को गोली मार दी गई. हत्या के बाद अरविंद और उसका जीजा कपड़े बदलकर अलग-अलग जगह घूमने चले गए थे.

सीसीटीवी कैमरो ने खोल दी अरविंद की करतूत

एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने जानकारी देते हुए बताया- शुरुआत में पुलिस खाली हाथ थी. लेकिन जब पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे लगभग 10 सीसीटीवी की फुटेज को खंगाला तो सीसीटीवी में आरोपियों की बाइक का नंबर दिखाई दिया और फिर बाइक के नंबर के आधार पर पुलिस उसके मालिक सलमान तक पहुंची. पुलिस ने जब सलमान से पूछताछ की तो सलमान ने बताया कि घटना वाले दिन उसकी बाइक उसका एक दोस्त ले गया था, जो अरविंद का किराएदार है. फिर इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस अरविंद तक पहुंच गई. एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने यह भी बताया कि आरोपी अरविंद बचपन में बाल सुधार गृह में आठ लोगों की हत्या के मामले में रह चुका है.