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जब ‘वनराज’ भी बन गए भक्त! रांची के तपोवन की वो अनसुनी कहानी, जहाँ ऋषि के भजन सुनने आता था शेर

नए साल के पहले पहले दिन बड़ी संख्या में लोग धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए जाते हैं. झारखंड के रांची के निवारणपुर में अति प्राचीन तपोवन मंदिर स्थित है. इस मंदिर को मिनी अयोध्या भी कहा जाता है. जहां पर विराजमान श्री राम जानकी के दर्शन कर लोग अपनी मनोकामना मांगते हैं. लगभग 400 साल पुरानी रांची की तपोवन मंदिर, राम भक्तों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है.

रामनवमी जैसे पावन अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. शहर के अलग-अलग अखाड़ों की ओर से निकाली जाने वाली रामनवमी की शोभा यात्रा और महावीरी झंडा बगैर तपोवन मंदिर की यात्रा किए पूरी नहीं मानी जाती. तपोवन मंदिर के महंत “श्री ओम प्रकाश शरण जी महाराज” ने बताया कि तपोवन मंदिर का यह स्थान, तप की भूमि है. सैकड़ों सालों पहले ऋषि-मुनि यहां तप किया करते थे. ऋषि-मुनियों के तप और भक्ति का असर ऐसा था कि खूंखार से खूंखार हिंसक जानवर भी इस स्थान पर आते ही हिंसा छोड़ शांत होकर बैठ जाता था.

पहले इस जगह पर होते थे जंगल

महंत “श्री ओम प्रकाश शरण जी महाराज ने बताया कि राजधानी रांची के जिस स्थान पर आज श्री राम जानकी तपोवन मंदिर स्थापित है. प्राचीन काल में यहां जंगल हुआ करता था. इस स्थल पर ऋषि-मुनि तप और भगवान की भक्ति करने के लिए आते थे. इसी दौरान बाबा बकटेश्वर महाराज जी अपने तप में लीन रहते थे. उसी समय इस स्थान पर जंगली हिंसक जीव जंतु भी होते थे. एक अंग्रेज अफसर जंगली जानवरों का शिकार करने निकला था.

उसने जैसे ही देखा की बकटेश्वर महाराज जी के नजदीक एक शेर है और उन पर जानलेवा हमला न कर दे, उसने उस शेर को गोली मार दी, जिसके बाद वहां तप कर रहे बाबा हिंसा देख क्रोधित हो गए. बाबा ने जब बताया कि यहां कोई हिंसक जानवर किसी दूसरे पर हमला नहीं कर सकता. दरअसल, वहां बैठकर शेर बाबा के गाए जा रहे भजन को सुन रहा था.

श्री राम जानकी जी की मूर्ति प्रकट हुई

इतना सुनते ही अंग्रेज अधिकारी को ग्लानि (Guilt) हुई और पश्चाताप करने लगा. इसके बाद ऋषि ने उस अफसर को प्रायश्चित करने के बजाय उपाय सुझाया. ऋषि ने उन्हें उसी स्थान पर शिव मंदिर की स्थापना का सुझाव दिया. इसके बाद ही उस अंग्रेज अधिकारी ने शिव मंदिर की स्थापना के लिए जमीन की खुदाई कराई थी. तभी उसी तपोवन क्षेत्र की जमीन के अंदर से श्री राम जानकी जी की मूर्ति खुदाई के क्रम में प्रकट हो गई, जिनके बाद ऐतिहासिक तपोवन परिसर में ही उन्हें अधिष्ठापित किया गया.

रातू महाराज के किला से भगवान हनुमान की मूर्ति भी उनके पूर्वजों के द्वारा ही इस मंदिर में लाकर प्राण प्रतिष्ठा की गई है. इसी तरह से अन्य देवी देवता भी इस मंदिर में विराजते हैं, जिस वजह से लोगों की आस्था से इस धार्मिक स्थल से जुड़ी हुई हैं. रांची में स्थित तपोवन मंदिर का नवर्निर्माण अयोध्या के श्री राम मंदिर की तर्ज पर किया जा रहा है. नए भव्य मंदिर का निर्माण 100 करोड़ रुपयों की लागत से लगभग 14,000 वर्गफुट क्षेत्र में राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना मार्बल का इस्तेमाल कर किया जा रहा है.

राम मंदिर की तर्ज पर बन रहा ये मंदिर

प्राचीन तपोवन मंदिर तप और आस्था का स्थान है. खासकर राम नवमी को लेकर इस मंदिर की महत्ता और भी बढ़ जाती है. 1929 से राजधानी रांची की निकलने वाली, महावीरी पताका तपोवन मंदिर ही आता है. अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की तर्ज पर बन रहे इस तपोवन मंदिर की भव्यता को बरकरार रखने के लिए इस मंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोनपुरा वही हैं, जिन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर का डिजाइन तैयार किया था.