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महाराष्ट्र की राजनीति: क्या फिर एक होंगे पवार?

सुप्रिया सुले की तेज हुई गतिविधियों से चर्चा का बाजार गर्म

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका और राज्य के अन्य आगामी निकाय चुनावों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में दशकों की प्रतिद्वंद्विता को भुलाकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने के बाद, अब राज्य की नजरें पवार परिवार की ओर टिक गई हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर मचे घमासान के बीच अब यह संकेत मिल रहे हैं कि शरद पवार और अजित पवार के गुट एक बार फिर साथ आ सकते हैं। इस सुगबुगाहट को शरद पवार की बेटी और वरिष्ठ सांसद सुप्रिया सुले के हालिया बयानों ने और अधिक हवा दे दी है।

सुप्रिया सुले का बड़ा संकेत और वैचारिक आधार एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान सुप्रिया सुले ने स्वीकार किया कि अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत का दौर जारी है।

सुले ने तर्क दिया कि अजित पवार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि भले ही उन्होंने राजनीतिक राहें अलग कर ली थीं, लेकिन उन्होंने एनसीपी की मूल विचारधारा और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को नहीं छोड़ा है। सुप्रिया के अनुसार, यही ‘एक विचारधारा’ दोनों धड़ों को फिर से एक मेज पर लाने का सबसे बड़ा आधार बन सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल मुख्य ध्यान निकाय चुनावों पर है और वे आपसी मतभेदों को दरकिनार कर सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

जुलाई 2023 में जब अजित पवार ने बगावत कर शिंदे-फडणवीस सरकार का हाथ थामा था, तब से दोनों गुटों के बीच कड़वाहट अपने चरम पर थी। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव के परिणामों ने जमीनी हकीकत बदल दी है। चुनाव में अजित पवार के गुट को मिली सफलता ने उन्हें एक शक्तिशाली खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया है, जबकि शरद पवार गुट के पास अपेक्षाकृत कम सीटें आईं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए दोनों गुटों का साथ आना केवल पारिवारिक भावना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति और मजबूरी भी है।

शिंदे-फडणवीस गठबंधन के लिए खतरे की घंटी यदि पवार परिवार के ये दोनों धड़े एकजुट हो जाते हैं, तो यह वर्तमान सत्ताधारी महायुति (भाजपा-शिंदे गुट) के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़ और मुंबई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एनसीपी का संयुक्त वोट बैंक समीकरणों को पूरी तरह पलटने की क्षमता रखता है। महाराष्ट्र की जनता के बीच इस ‘घर वापसी’ को लेकर भारी उत्सुकता है, क्योंकि यह न केवल एक परिवार का मिलन होगा, बल्कि राज्य की सत्ता के भविष्य का निर्णायक मोड़ भी साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।