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प्रदूषण का कहर! नोएडा में 5 साल के बच्चे का निकाला टॉन्सिल, मां ने प्रदूषण को बताया वजह, जानें इस पर डॉक्टर की राय

दिल्ली-NCR में एयर पॉल्यूशन लोगों की हेल्थ पर बुरा असर डाल रहा है. अब कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें पॉल्यूशन ने गंभीर रूप से लोगों को प्रभावित किया है. खराब हवा से होने वाले बेटे की नुकसान को बताते हुए एक पोस्ट में, एक महिला ने कहा कि उसके पांच साल के बेटे को पॉल्यूशन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से टॉन्सिल निकालने के लिए सर्जरी करानी पड़ी.

पोस्ट में महिला ने बताया कि वह दो साल पहले परिवार के साथ नोएडा शिफ्ट हुई थी, जिसके बाद से उनके बेटे को समस्या होने लगी. सेक्टर 143 में रहने वाली साक्षी पाहवा ने कहा कि उनके बेटे को पुरानी एलर्जी, नाक बंद होना, टॉन्सिल में सूजन और सांस लेने में दिक्कत होने लगी और किसी भी इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ. हालात ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें सर्जरी करानी पड़ी.

NCR आकर बिगड़ी हालात

बच्चे के पिता सचिन कंबोज ने न्यूज आउटलेट TOI को बताया, “हम दो साल पहले सिरसा से नोएडा आए थे और उसके तुरंत बाद मेरे बेटे को लगातार खांसी और जुकाम रहने लगा. पहले तो हमें लगा कि यह सिर्फ मौसमी फ्लू है, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई. लगातार एलर्जी, धूल और पॉल्यूशन की वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी.” पिता ने बताया कि उन्होंने होम्योपैथी और एलोपैथी दोनों का इलाज किया, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया.

क्या बोले इलाज करने वाले डॉक्टर?

बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा कि लगातार गंदी हवा या दूसरी एलर्जी की वजह से उसके एडेनोइड्स और टॉन्सिल बढ़ गए होंगे, जिससे बच्चे की सांस की नली को साफ करने और सांस लेने में सुधार के लिए सर्जरी एडेनोइडेक्टॉमी और टॉन्सिल्लेक्टोमी विद टर्बिनेट रिडक्शन ज़रूरी हो गई थी.

डिस्चार्ज समरी के मुताबिक, बच्चे को बढ़े हुए एडेनोइड्स और टॉन्सिल के साथ-साथ टर्बिनेट हाइपरट्रॉफी (नाक के अंदर सूजन) की वजह से सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी. इससे नाक के रास्ते बंद हो गए, जिससे नाक से सांस लेना मुश्किल हो गया, नींद में जोर-जोर से खर्राटे आने लगे और निगलते समय दर्द या बेचैनी होने लगी. इस रुकावट ने नॉर्मल सांस लेने पर, खासकर रात में बहुत असर डाला, जिससे बच्चे को सांस लेने में मुश्किल हो रही थी.

सांस से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे रहा प्रदूषण

बच्चे का इलाज करने वाले डॉ. शशिधर ने कहा, “कोविड लॉकडाउन के दौरान, ऐसी सूजन के मामले लगभग गायब हो गए थे. हालांकि, हाल ही में ये फिर से बढ़ गए हैं, जिससे पता चलता है कि प्रदूषण एडेनोइड और टॉन्सिल की सूजन जैसी सांस की समस्याओं को शुरू करने में अहम भूमिका निभा रहा है.