बलौदाबाजार जिला अस्पताल का लैब बना भारत का दूसरा NQAS सर्टिफाइड लैब, मरीजों को मिल रही निःशुल्क जांच की सुविधाएं
बलौदाबाजार: सरकारी अस्पतालों के बारे में आम धारणा यह रही है कि यहां भीड़ रहती है, संसाधन सीमित होते हैं और सेवाओं का स्तर बहुत संतोषजनक नहीं होता. लेकिन बलौदाबाजार जिला अस्पताल ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. जिला अस्पताल की हमर लैब को राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिला है. यहां के इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वॉलिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत क्वॉलिटी सर्टिफिकेट मिला है.
बलौदाबाजार जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी सफलता
किसी सरकारी लैब के लिए NQAS सर्टिफिकेशन हासिल करना आसान नहीं होता. इसके लिए कई गुणवत्ता मापदंडों पर खरा उतरना पड़ता है. साफ-सफाई, सटीक जांच, बायो-सेफ्टी, रिपोर्टिंग समय, मरीज सुविधा, उपकरणों का मानकीकरण, स्टाफ की दक्षता और डेटा मैनेजमेंट जैसे मानकों पर लैब को लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होता है. लौदाबाजार की लैब ने इन सभी क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है. ये सिर्फ लैब नहीं, एक ऐसा मॉडल है जिसने सरकारी हेल्थ सिस्टम को क्वॉलिटी और भरोसे का नया मानक दिया है. बलौदाबाजार जैसे जिले की लैब का देश में दूसरा नंबर पाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. पहला नंबर जिला अस्पताल पंडरी को मिला है.
हमर लैब का जायजा
अस्पताल पहुंची और व्यवस्थाओं का जायजा लिया. तकनीशियनों से बात की और रिपोर्टिंग सिस्टम को देखा. जिसके बाद ये पता चला कि इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब के पीछे सिर्फ मशीनों की व्यवस्था नहीं है, बल्कि प्रशासन, डॉक्टर, तकनीशियन और नर्सिंग स्टाफ सबकी संयुक्त कोशिश है.
इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) बलौदाबाजार में रोज 1,000 से 1,200 के बीच जांचें होती हैं. लैब में 100 से ज्यादा तरह के टेस्ट उपलब्ध हैं. यह संख्या किसी भी बड़े शहर की मान्यता प्राप्त निजी लैब के बराबर कही जा सकती है. इतना ही नहीं, यहां की रिपोर्टिंग स्पीड भी अन्य सरकारी संस्थानों से काफी बेहतर है. कई टेस्टों की रिपोर्ट कुछ ही घंटों में उपलब्ध कराई जाती है, जिससे मरीजों को इलाज समय पर मिल पाता है.
हमर लैब में क्या सुविधाएं हैं मौजूद ?
1. सैंपल कलेक्शन सेंटर
सुबह 9 बजे से ही बड़ी संख्या में मरीज पहुंचने लगते हैं. यहां बारकोड के जरिए सैंपल ट्रैक किया जाता है.इससे गलती की गुंजाइश खत्म हो जाती है.
2. बायोकैमिस्ट्री सेक्शन
जहां शुगर, यूरिक एसिड, किडनी-लिवर प्रोफाइल जैसी अहम जांचें होती हैं. पूरी प्रक्रिया मशीन-आधारित है, जिससे सटीकता बढ़ती है.
3. माइक्रोबायोलॉजी यूनिट
यह लैब को NQAS के लिए उच्च स्कोर दिलाने में अहम रही. यहां बैक्टीरिया कल्चर, सेंसिटिविटी टेस्ट और इंफेक्शन से जुड़े टेस्ट बेहद सटीक तरीके से होते हैं.
4. रिपोर्ट कंट्रोल रूम
सभी रिपोर्ट डिजिटल होती हैं. तय समय के भीतर हर रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा जाता है. हर महीने क्वॉलिटी ऑडिट होता है.
कैसे मिला राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र?
NQAS सर्टिफिकेशन एक लंबी और गंभीर प्रक्रिया होती है. लैब को हर उस परीक्षण से गुजरना होता है जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के लिए जरूरी है. लैब में कर्मचारियों को समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया. टेस्ट की सटीकता बढ़ाने के लिए बाहरी और आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया लागू की गई. रिपोर्टिंग सिस्टम को डिजिटाइज किया गया, जिससे मरीजों के रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और रिपोर्ट तैयार करने में त्रुटियों की संभावना लगभग खत्म हो जाए.
NQAS की मानक प्रक्रिया की जांच के बारे में सीएमएचओ राजेश अवस्थी ने बताया “A से लेकर H तक चैक लिस्ट में ये देखा जाता है कि जो सैंपल आ रहे हैं उनकी जांच नियमानुसार और पैरामीटर से हो रही है या नहीं. उनकी टेस्टिंग सही समय पर और सही गुणवत्तापूर्वक हो रही है या नहीं. इसमें मानक को प्रमाणित करने के लिए वेल्लोर की लैब से सैंपल आए थे जिनका जांच कर रिपोर्ट भेजी. वहां से ये रिपोर्ट आई कि सही रिपोर्ट आई है. इसके बाद क्वॉलिटी एश्योरेंस होता है. फिर वो लैब क्वॉलिफाई करती है जिसके बाद क्वॉलिटी सर्टिफिकेट मिला है.”
लैब में काम करने वाले तकनीशियन नियमित रूप से SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का पालन करते हैं, जिससे हर प्रक्रिया तय गुणवत्ता के अनुसार होती है. NQAS की टीम जब लैब निरीक्षण के लिए पहुंची, तो यहां की प्रक्रियाओं की एक-एक लेयर की जांच की गई. साफ-सफाई, स्टाफ की दक्षता, बायो वेस्ट मैनेजमेंट, मशीनों की स्थिति, डेटा का रखरखाव, रिपोर्टिंग समय हर चीज को ध्यान से परखा गया. जिला अस्पताल की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट स्तर पर पाई गई, जिसके बाद इसे यह राष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्रदान किया गया.
हमर लैब में 103 तरह की जांच होती है. इसमें आरएफटी, एलएफटी, लिपिड प्रोफाइल, सीबीसी की जांच होती है. इसके अलावा ब्लड कल्चर, यूरीन कल्चर की जांच होती है. पहले ये सुविधा इस अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी लेकिन अब इसकी भी जांच की जा रही है. लैब में सबसे ज्यादा सीबीसी सबसे ज्यादा होती है. मलेरिया, टीबी की भी जांच होती है-राजेश अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), बलौदाबाजार
आम मरीजों को क्या फायदा?
इस उपलब्धि का असली लाभ सीधे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को मिल रहा है.
जांच बिल्कुल मुफ्त: जहां निजी लैबों में सामान्य टेस्ट भी 200 से 600 रुपये में होते हैं, वहीं यहां पूरी तरह मुफ्त हैं.
दूर जाने की जरूरत नहीं: गांवों से रायपुर तक जाना लोगों के लिए समय, खर्च और परेशानी का कारण था. अब यह समस्या खत्म हो गई है.
रिपोर्ट समय पर: कई बीमारियां समय पर रिपोर्ट आने से ही बेहतर इलाज पा सकती हैं. यहां तय समय में रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है.
विश्वसनीय रिजल्ट: NQAS सर्टिफिकेशन का मतलब है कि लैब द्वारा की गई टेस्टिंग वैज्ञानिक और मानक प्रक्रियाओं के आधार पर की जाती है. मरीज के हाथ में दी गई रिपोर्ट भरोसेमंद होती है.
गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान: मधुमेह, किडनी, रक्ताल्पता, थायरॉयड, संक्रमण, डेंगू, मलेरिया और कई अन्य बीमारियों की शुरुआती स्तर पर पहचान अब आसानी से की जा रही है.
मैं कई दिनों से कमजोरी महसूस कर रहा था, इसलिए CBC जांच कराने आया था. यहां प्रक्रिया बहुत आसान लगी. सैंपल लेते ही कुछ ही देर में रिपोर्ट मिल गई. कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगा और स्टाफ ने हर चीज समझाकर किया. सरकारी लैब में इतनी अच्छी सुविधा देखकर अच्छा लगा- तुकेश यादव, CBC जांच कराने आए मरीज
डॉक्टर ने मुझे लिवर और किडनी टेस्ट करवाने कहा था. पहले सोच रहा था कि बाहर कराना पड़ेगा, लेकिन यहां सब जांच मुफ्त में हो गई. स्टाफ ने जल्दी सैंपल लिया और रिपोर्ट भी समय पर दे दी. रिपोर्ट मुझे व्हाट्सएप पर भी प्राप्त हुई. उसके बाद में जाकर फिर जिला अस्पताल से ओरिजनल रिपोर्ट लिया. अब इलाज भी आसानी से आगे बढ़ पाएगा. अब जिले के लोगों के लिए ये सुविधा बहुत मददगार है- छोटू, लिवर और किडनी की जांच कराने आया मरीज
मुझे ब्लड प्रेशर और जोड़ों में दर्द की शिकायत थी, इसलिए लिपिड और यूरिक एसिड टेस्ट कराया. यहां मशीनें नई हैं, टेस्ट भी जल्दी होता है और रिपोर्ट बिल्कुल साफ रहती है. बाहर निजी लैब में हजार रुपये से ऊपर खर्च होता, लेकिन यहां बिना पैसे सब जांच हो गई. ऐसी सुविधा हमारे जैसे लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है- गोविंद पटेल, लिपिड प्रोफाइल और यूरिक एसिड टेस्ट आए मरीज
लैब के अंदर की व्यवस्था क्यों अलग है?
लैब में उपकरणों को अपग्रेड किया गया है, पूरे परिसर में साफ-सफाई और बायोसेफ्टी मानकों का पालन होता है. काम करने वाले तकनीशियन सुरक्षा किट, ग्लव्स, मास्क और लैब कोट जैसे जरूरी प्रोटोकॉल का पालन करते हैं. रिजल्ट की सटीकता बढ़ाने के लिए हर बैच की टेस्टिंग के साथ QC (क्वालिटी कंट्रोल) भी किया जाता है. लैब का पूरा संचालन डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम पर आधारित है. इससे रिपोर्ट की गलतियों, डुप्लिकेशन, फॉर्मेट में गड़बड़ी और समय की बर्बादी जैसी समस्याएं खत्म हो गई हैं. हर टेस्ट के लिए तय प्रोटोकॉल मौजूद है और स्टाफ उन्हीं के अनुसार काम करता है.
टीमवर्क ने दिलाया बड़ा सम्मान
किसी सरकारी लैब में इतनी सटीकता और व्यवस्थित काम दिखना खुद में बड़ी बात है. लैब के चिकित्सा अधिकारी, तकनीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, बायोकेमिस्ट और जिला अस्पताल प्रबंधन ने मिलकर इस मानक को हासिल किया है. कई महीनों तक लैब की तैयारियां, मॉनिटरिंग, सुधार और दस्तावेजीकरण का काम लगातार चलता रहा. यह मेहनत आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर चमक उठी.
लैब में हर दिन बहुत मरीज आते हैं. हमारा काम यह है कि मरीजों को सही तरीके से गाइड करें और सैंपल कलेक्शन तक आसानी से पहुंचाएं- नंदनी साहू, रिसेप्शन, जिला अस्पताल बलौदाबाजार
पर्ची आती है. बारकोड रजिस्ट्रेशन करते हैं. फिर सैंपलिंग के लिए भेजा जाता है –सुमन साहू, IPHL और हमर लैब, बलौदाबाजार
टेस्ट करने से पहले क्वॉलिटी कंट्रोल टेस्ट करते हैं. लिवर-किडनी जैसे महत्वपूर्ण टेस्ट भी करते हैं -गोपी किशन, IPHL टेक्नीशियन
सैंपल आने के बाद रोटेटर के बाद मशीन में टेस्ट लगाते हैं. इसमें 20 मिनट लगता है. 30 मिनट के अंदर मरीज को रिपोर्ट दे देते हैं -लक्ष्मीनारायण आजाद, MLT, जिला अस्पताल, बलौदाबाजार
IPHL में रोज 1000 से ज्यादा जांच होती हैं. तने दबाव में काम करना आसान नहीं, लेकिन हमारी टीम प्रशिक्षित है और हर टेस्ट को स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के हिसाब से करती है. मशीनें पूरी तरह ऑटोमेटेड हैं, जिससे गलतियों की गुंजाइश बहुत कम हो जाती है. 24 घंटे लैब चलती है. जांच होती है और रिपोर्ट दी जाती है –राकेश बंजारे, IPHL व हमर लैब प्रभारी / लैब इंचार्ज
हमर लैब में हर टेस्ट बिल्कुल फ्री
मरीजों को मिली रही सुविधाओं के बारे में CMHO कहते हैं कि जिस टेस्ट कराने पहले मरीजों को रायपुर जाना पड़ता था, या फिर जिनका कॉस्ट काफी ज्यादा था वो टेस्ट भी अब जिला अस्पताल के हमर लैब में बिल्कुल फ्री हो रहे हैं. जो टेस्ट उपलब्ध नहीं है उनकी जांच जीवनदीप समिति के जरिए आउटसोर्स कराकर मरीज को निशुल्क उपलब्ध करा रहे हैं.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश अवस्थी ने बताया कि कम समय में मरीज को जांच रिपोर्ट मिले इस पर भी काम किया जा रहा है. मरीज को वॉट्सएप पर रिपोर्ट भेजी जा रही है. इसके अलावा ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से भी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है. बलौदाबाजार की IPHL का देश की दूसरी NQAS सर्टिफाइड लैब बनना जिले के लिए गर्व की बात है. यह दिखाता है कि सरकारी लैब भी उच्च स्तर की क्वालिटी दे सकती है.