दिल्ली की हवा हुई जहरीली! प्रदूषण से सांस लेना मुश्किल, 20 इलाके रेड जोन में, AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण (Delhi Air Pollution) का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. बुधवार सुबह सड़कों पर धुंध दिखाई दी. वाहन चलाने वाले लोगों ने आंखों में जलन और घुटन जैसी समस्या हुई. दिल्ली के अधिकतर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 से 380 के बीच रिकॉर्ड किया गया, जहां की हवा की गुणवत्ता बेहद खतरनाक श्रेणी में है.
प्रदूषण का स्तर बेहद खराब होने पर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के स्टेज-3 को लागू कर दिया है, जिसमें स्टेज-4 की कुछ सख्ती भी जोड़ दी गई है, ताकि प्रदूषण पर तुरंत नियंत्रण लाया जा सके. GRAP-3 लागू होते ही गैर-जरूरी निर्माण पर रोक लगा दी गई है, जिसमें मिट्टी खुदाई, ट्रेंचिंग, पाइलिंग और ओपन-एयर RMC प्लांट्स को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है.
बुधवार को इन इलाकों में कितना है AQI?
- बवाना-382
- रोहिणी- 379
- वज़ीरपुर- 375
- मुंडका- 374
- पंजाबी बाग- 369
- नेहरू नगर- 368
- DTU- 367
- आनंद विहार- 364
- विवेक विहार- 365
- आईटीओ- 360
- डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज- 356
- नरेला- 352
- चान्दनी चौक- 338
- ओखला फेज-2 334
- नॉर्थ कैंपस- 327
- शादीपुर- 345
- आईजीआई एयरपोर्ट T3- 301
- लोधी रोड- 300
- मंदिर मार्ग- 263
- दिलशाद गार्डन -248
प्रदूषण को देखते हुए ये पाबंदियां लागू
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए उद्योगों में भी सख्ती की गई है और स्टोन क्रशर, खनन साइट्स तथा गैर-क्लीन फ्यूल से चलने वाले हॉट-मिक्स प्लांट पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं. वाहन प्रतिबंधों के तहत दिल्ली और एनसीआर जिलों, जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों पर रोक लगा दी गई है और इंटर-स्टेट डीजल बसों के दिल्ली में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिसमें सिर्फ CNG, इलेक्ट्रिक और BS-VI बसों को छूट मिलेगी. डीजल जेनरेटर सेट्स का उपयोग भी बंद कर दिया गया है, सिवाय अस्पतालों और एयरपोर्ट जैसी आवश्यक सेवाओं के.
प्रदूषण के स्रोतों का विश्लेषण करने वाली पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में कुल प्रदूषण में वाहनों का योगदान 19.6 प्रतिशत रहा और पराली जलाने का प्रभाव सिर्फ 1.5 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि बुधवार के लिए अनुमान लगाया गया है कि वाहन प्रदूषण बढ़कर 21.1 प्रतिशत तक जा सकता है और पराली का प्रभाव लगभग स्थिर रहेगा.
प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी कार्यालयों को 50 प्रतिशत स्टाफ उपस्थिति के साथ संचालित करने और बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने का आदेश जारी किया है, जबकि स्कूलों में छुट्टियों या ऑनलाइन क्लास का फैसला स्थानीय प्रशासन प्रदूषण स्तर के आधार पर ले रहा है.