चीन ने नई अंतरिक्ष संधि को किया खारिज
बीजिंगः चीन ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों के नियंत्रण के लिए प्रस्तावित एक नई संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। यह संधि पृथ्वी की कक्षा से परे अंतरिक्ष में सैन्यीकरण को रोकने और अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से लाई गई थी। चीन के इस फैसले ने अमेरिका और रूस के साथ-साथ दुनिया भर के कई देशों के बीच चिंता बढ़ा दी है, जो अब बाहरी अंतरिक्ष में एक संभावित नई हथियारों की दौड़ के खतरे को लेकर चिंतित हैं।
चीन ने अपने विरोध को सही ठहराते हुए कहा है कि यह संधि अपर्याप्त है और इसमें साइबर युद्ध और जमीनी-आधारित एंटी-सैटेलाइट हथियार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल नहीं किया गया है। बीजिंग का तर्क है कि जब तक सभी प्रकार के अंतरिक्ष-संबंधी सैन्य खतरों को व्यापक रूप से संबोधित नहीं किया जाता, तब तक वह किसी भी समझौते का समर्थन नहीं करेगा।
आलोचकों का मानना है कि चीन का यह रुख उसके अपने तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम और संभावित रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को विकसित करने की उसकी महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। चीन ने हाल के वर्षों में अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं का तेजी से विस्तार किया है, जिसमें पुन: दोबारा इस्तेमाल होने वाले यान और उन्नत उपग्रहों का विकास शामिल है।
अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों ने चीन के इस विरोध को निराशाजनक बताया है। उन्होंने जोर दिया है कि अंतरिक्ष को शांतिपूर्ण उपयोग के लिए बनाए रखने और सभी राष्ट्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह संधि आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ का जोखिम बहुत बड़ा है। उपग्रहों को निशाना बनाने वाले हथियार, यहाँ तक कि परीक्षण के दौरान भी, अंतरिक्ष मलबे की खतरनाक मात्रा उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यह मलबा पृथ्वी की कक्षाओं को लंबे समय तक अनुपयोगी बना सकता है।
चीन का यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह अंतरिक्ष शासन और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के प्रयासों को कमजोर करता है। अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने यह चुनौती है कि चीन और अन्य असहमत देशों को शामिल किए बिना, अंतरिक्ष को सुरक्षित रखने के लिए एक वैकल्पिक तंत्र कैसे विकसित किया जाए। यह घटनाक्रम एक बार फिर से इस बात को रेखांकित करता है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए वैश्विक महाशक्तियों के बीच सहमति कितनी महत्वपूर्ण है।