Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Valentine's Day Scam: वैलेंटाइन डे पर प्यार के नाम पर 'लूट'! इन 3 ऑनलाइन स्कैम से रहें सावधान, खाली ... Mahabharata Mystery: शकुनि नहीं, बल्कि ये पात्र था महाभारत का असली खलनायक! भगवान कृष्ण ने भी किया था... Glowing Skin Tips: चेहरे पर आएगा कुदरती नूर! ये 5 चीजें अपनाएं, बिना मेकअप भी फोटो में दिखेंगी कमाल Sunetra Pawar Cabinet Meeting: सुनेत्रा पवार की पहली कैबिनेट बैठक, अजित दादा के 3 बड़े सपनों को दी म... Raja Bhaiya Shastra Puja: मां शारदा के गर्भगृह में राजा भैया ने की शस्त्र पूजा; मैहर से वीडियो वायरल... Manipur Violence: मणिपुर के उखरुल में फिर भड़की हिंसा, 50 से ज्यादा घर फूंके; पूरे जिले में 5 दिन के... Ajit Pawar News: प्लेन क्रैश के दिन जहां प्रचार करने वाले थे अजित पवार, वहां NCP की 'बंपर' जीत; पुणे... Congress vs Om Birla: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव, लेकिन राहुल गांधी ने न... Parliament Ruckus: PM मोदी की सीट के पास विपक्ष का हंगामा, किरेन रिजिजू का दावा- 'बड़ा सीन होने से ह... Parliament News: 'PM की सीट घेरी, चैंबर में चिल्लाए', विपक्ष के खिलाफ एकजुट हुईं BJP की महिला सांसद;...

फर्जी वैज्ञानिक के पास परमाणु डेटा मिला

परमाणु अनुसंधान केंद्र के संवेदनशील आंकड़े बाहर पाये गये

  • पहले भी संदिग्ध गतिविधियां रही है उसकी

  • फर्जी पासपोर्ट और नकली पहचान पत्र मिला

  • विदेश से कई बार फोन पर बात भी की है

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः देश की सुरक्षा और परमाणु अनुसंधान इकाई, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से जुड़े एक बड़े और संवेदनशील मामले में, मुंबई पुलिस ने एक फर्जी वैज्ञानिक की गिरफ्तारी के बाद उसके पास से संदिग्ध परमाणु डेटा और 14 नक्शे बरामद किए हैं। वर्सोवा में गिरफ्तार किए गए इस संदिग्ध, अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी, की पहचान अब एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता के रूप में उभरी है। पुलिस इन दस्तावेजों की गहन जाँच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनमें कोई संवेदनशील या गोपनीय परमाणु जानकारी शामिल नहीं है, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

हुसैनी, जो खुद को एक वैज्ञानिक बताकर कई नामों से जाना जाता था, के पास से कई फर्जी पासपोर्ट, आधार और पैन कार्ड, साथ ही नकली बीएआरसी पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं। उसकी दो फर्जी पहचानों में से एक में वह अली रज़ा हुसैन और दूसरी में अलेक्जेंडर पामर के नाम से जाना जाता था।

जाँच में पता चला है कि हुसैनी लंबे समय से अपनी पहचान बदलकर और भेष बदलकर रह रहा था, जिसके पीछे एक लंबा आपराधिक इतिहास है। सूत्रों के अनुसार, हुसैनी ने पिछले कुछ महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय कॉल किए थे, और अब उसके कॉल रिकॉर्ड का पता लगाया जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि वह ऐसे विदेशी नेटवर्क के संपर्क में था जिनका संबंध इस संदिग्ध परमाणु डेटा से हो सकता है। यह संदेह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय जासूसी या परमाणु रहस्यों को बेचने के संभावित प्रयास की ओर इशारा करता है।

हुसैनी का अतीत भी संदिग्ध है; 2004 में, उसे गोपनीय दस्तावेज़ रखने वाला वैज्ञानिक होने का दावा करने के बाद दुबई से निर्वासित कर दिया गया था। निर्वासन के बावजूद, उसने नकली पासपोर्टों का इस्तेमाल करके दुबई, तेहरान और अन्य संवेदनशील जगहों की यात्रा की। जमशेदपुर निवासी हुसैनी ने 1996 में अपना पुश्तैनी घर बेच दिया था, लेकिन अपने पुराने संपर्कों की मदद से नकली दस्तावेज़ हासिल करना जारी रखा।

इस जालसाजी में उसके भाई आदिल हुसैनी की संलिप्तता भी सामने आई है। आदिल ने अख्तर को झारखंड निवासी मुनज़्ज़िल खान से मिलवाया था, जिन पर दो जाली पासपोर्ट (मोहम्मद आदिल और नसीमुद्दीन सैयद आदिल हुसैनी के नाम से) बनवाने का संदेह है। ये पासपोर्ट उसी जमशेदपुर स्थित पुराने पते पर बने थे, जिसे 30 साल पहले बेच दिया गया था। पुलिस को संदेह है कि हुसैनी बंधुओं ने विदेश यात्रा के लिए इन जाली दस्तावेज़ों और नकली पहचानों का इस्तेमाल किया।

दिलचस्प बात यह है कि आदिल हुसैनी को हाल ही में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन अख्तर ने पूछताछ के दौरान गुमराह करने के लिए दावा किया कि उसके भाई की मृत्यु हो चुकी है। अब जाँच में मुनज़्ज़िल खान के भाई इलियास खान की भागीदारी भी उजागर हुई है, जिसे वांटेड घोषित किया गया है। इलियास खान पर अख्तर हुसैनी को फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र (स्कूल और कॉलेज की डिग्रियों सहित) मुहैया कराने का आरोप है।

इसके अलावा, अख्तर मेरठ पुलिस को उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ असंतोष भड़काने के एक मामले में भी वांछित है। यह गिरफ्तारी कई गंभीर सवालों को जन्म देती है, जैसे कि फर्जी वैज्ञानिक बीएआरसी जैसे संवेदनशील संस्थान से जुड़े संवेदनशील डेटा तक कैसे पहुंचा, और उसका विदेशी संपर्कों तथा परमाणु डेटा का क्या मकसद था। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं।