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जय हो राजेश भैया ,जय हो राज्य सरकार

चरण चुम्बकों को चेयरमैन, जमीन से जुड़े नेताओं को मैदान

  • आर पी एन सिंह का असर झेल रही पार्टी

  • चमचागिरी ने नेतृत्व को झांसा दे रखा है

  • संगठन के अंदरखाने भीषण असंतोष व्याप्त

शिव कुमार अग्रवाल

रांचीः झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर गहरा असंतोष और आंतरिक कलह की खबरें सामने आ रही हैं, जिसने पार्टी के संगठनात्मक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जय हो राजेश भैया, जय हो राज्य सरकार जैसे नारों के बीच जमीनी स्तर के नेताओं में यह भावना प्रबल हो रही है कि उनकी दशकों की निष्ठा और मेहनत को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। पार्टी के भीतर यह आरोप लग रहे हैं कि चरण चुम्बकों और चाटुकारों को महत्वपूर्ण पद और ज़िम्मेदारियाँ दी जा रही हैं, जबकि जमीन से जुड़े और कर्मठ नेताओं को हाशिये पर धकेल दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी रहे आर.पी.एन. सिंह का प्रभाव आज भी प्रदेश कांग्रेस में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। हालांकि, ऊपरी भाग-दौड़ और कागज़ी आँकड़ों में पार्टी भले ही रेस दिखा रही हो, लेकिन अंदरूनी तौर पर जमीनी स्तर के नेताओं में भारी असंतोष व्याप्त है।

एक चर्चित कहावत के अनुसार, बबूल के पेड़ में आम कहाँ से होगा। यह असंतोष इस बात का प्रतीक है कि ग्रासरूट के कार्यकर्ताओं को मान-सम्मान देने की परिपाटी अब कांग्रेस पार्टी में समाप्त हो चली है। अब यह धारणा बन गई है कि जो जितना बड़ा चरण चुम्बक होगा, लाभ उसी को मिलेगा।

यह विडंबना है कि झारखंड जैसे अलग राज्य की अवधारणा यहाँ के मूलवासियों के हित में गढ़ी गई थी, परंतु कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने आर.पी.एन. सिंह जैसे उत्तर प्रदेश से आयातित और भौतिक सुख बटोरने वाले नेता को प्रदेश की ज़िम्मेवारी सौंप दी। श्री सिंह ने जानबूझ कर प्रदेश संगठन में ऐसे-वैसे लोगों को महत्व एवं पद देना शुरू किया।

हद तो तब हो गई जब एक ऐसे व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया गया, जो पूर्व में राजभवन में दलाली करने के लिए चर्चित रहे। सूत्रों का कहना है कि इसी दौर में और भी कई दलाल निगम बोर्ड के चेयरमैन बन गए, जिनमें कई इस राज्य के मूलनिवासी ही नहीं थे। चाटुकारों और दलालों को खोज-खोज कर उपकृत किया गया।

भले ही आर.पी.एन. सिंह कांग्रेस पार्टी को केसरिया झंडा (भाजपा की ओर इशारा) दिखा कर उड़ गए हों, लेकिन आज भी उनके द्वारा संरक्षित नेता भैया जी के सानिध्य में पद पर बने हुए हैं। पार्टी में यह संदेश साफ है कि जो जितना बड़ा कलाकार (चाटुकारिता में निपुण) है, उसे उतना बड़ा पद मिलेगा।

अंदर खाने से मिली खबर के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एक संगठित गिरोह के साथ मिलकर कांग्रेस आलाकमान के नाम पर झारखंड सरकार में दलाली कर रहे हैं। जानकार तो यहाँ तक बता रहे हैं कि वर्तमान मुख्य सचिव से उनकी अच्छी छन रही है, क्योंकि वे दोनों पूर्व में राजभवन में साथ रहे हैं।

यह भी आरोप है कि मुख्यमंत्री को भी कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व का हवाला देकर झाँसे में रखा गया है। यह स्थिति न केवल पार्टी के मनोबल को गिरा रही है, बल्कि राज्य सरकार की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यदि कांग्रेस आलाकमान ने जल्द ही इस जमीनी असंतोष का संज्ञान नहीं लिया, तो आने वाले समय में इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।