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इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियारों से भारतीय सैनिक गल गये

अमेरिकी सीनेटर का गलवान घाटी संघर्ष पर अजीब बयान

  • भारत और चीनी सैनिक टकराये थे

  • टेनेसी से सांसद चुने गये हैं हेगर्टी

  • किसी पक्ष ने इसकी पुष्टि नहीं की

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अमेरिकी सीनेटर बिल हेगर्टी ने हाल ही में भारत और चीन के बीच 2020 के सीमा संघर्ष को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी में हुई झड़प के दौरान, चीन ने भारतीय सैनिकों पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे वे पिघलने लगे थे। सीनेटर हेगर्टी, जो टेनेसी से रिपब्लिकन पार्टी के हैं, ने अमेरिका-भारत संबंधों पर एक चर्चा के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन ने गोलीबारी की जगह एक ऐसे हथियार का प्रयोग किया, जिसका असर बेहद घातक था।

यह बयान उस समय आया है, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजिंग में एक सम्मेलन में भाग लिया, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी तस्वीर पर अमेरिका के कुछ हलकों में चिंता व्यक्त की गई थी। सीनेटर हेगर्टी ने इन चिंताओं की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को भारत और चीन के बीच मौजूद गहरे अविश्वास को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल एक फोटो तक सीमित नहीं होते हैं, बल्कि उनके पीछे एक लंबा इतिहास और जटिलताएं होती हैं। हेगर्टी के अनुसार, चीन और भारत के बीच कई पुरानी शिकायतें हैं, और दोनों देशों की प्रतिद्वंद्विता को सार्वजनिक कूटनीति से नहीं छिपाया जा सकता।

गलवान संघर्ष के बाद, 2020 में चीन के सरकारी मीडिया ने यह दावा किया था कि उन्होंने भारतीय सैनिकों को विवादित क्षेत्रों से हटाने के लिए गैर-घातक माइक्रोवेव हथियारों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, उस समय न तो भारत और न ही चीन ने इस तरह की किसी घटना की आधिकारिक पुष्टि की थी।

सीनेटर हेगर्टी का सैनिकों के पिघलने वाला बयान किसी भी सार्वजनिक सैन्य रिकॉर्ड या विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोतों से प्रमाणित नहीं हुआ है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। मौजूदा समय में, भारत एक ओर अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ अपने जटिल संबंधों को सावधानीपूर्वक संतुलित करने का प्रयास कर रहा है। हेगर्टी के ये दावे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर कूटनीतिक हलकों में काफी चर्चा हो रही है।