Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mahashivratri 2026: दूल्हा बनकर निकले पातालेश्वर महादेव, माता पार्वती संग रचाया ब्याह; बारात में जमक... Indian Currency Update: अब भारतीय सिक्के पर दिखेगी 'वंदे भारत' ट्रेन, सरकार ने जारी किया 100 रुपये क... Mahakaleshwar Temple Decoration: 4 देशों के फूलों से महका महाकाल का दरबार, बेंगलुरु के 200 कलाकारों ... Ujjain Mahakal Darshan: महाशिवरात्रि पर 44 घंटे खुले रहेंगे बाबा महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा अद... Indian Navy Rescue: भारतीय नौसेना ने बीच समंदर में जापानी नाविक को किया एयरलिफ्ट, 200 किमी दूर से ऐस... Delhi EOL Vehicle News: दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', अब बिना नोटिस सीधे स्क्रैप... UP Politics: पूर्व मंत्री अनीस खान समेत 100 से ज्यादा दिग्गज आज थामेंगे सपा का दामन, अखिलेश यादव की ... Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद में रिश्तों का कत्ल, ढाई साल की बेटी से अश्लील हरकत करते पिता को मां... Kashi Vishwanath Mahashivratri 2026: काशी में उमड़ा भक्तों का सैलाब, 3 KM लंबी लाइन; जानें बाबा विश्... Uzma Khan Kanwar Yatra: मुराद पूरी हुई तो कांवड़ लेकर निकलीं उजमा खान, महादेव की भक्ति में लीन होकर ...

प्रयोगशाला में तैयार किया सोना

वैज्ञानिकों ने कर दिखाया एक और नया कमाल

कैलिफोर्नियाः हम सभी जानते हैं कि सोना एक बहुमूल्य धातु है। सोना दिन-ब-दिन मध्यम वर्ग की पहुँच से दूर होता जा रहा है। लेकिन क्या इस बार यह पीली धातु आसानी से उपलब्ध होगी? क्योंकि कैलिफ़ोर्निया के वैज्ञानिकों ने यह दावा करके दुनिया को चौंका दिया है कि पारे से सोना बनाया जा सकता है। कैलिफ़ोर्निया की एक स्टार्टअप कंपनी का दावा है कि परमाणु भौतिकी और संलयन तकनीक की प्रगति ने इस असंभव को संभव बना दिया है। कैलिफ़ोर्निया की स्टार्टअप कंपनी मैराथन फ़्यूज़न का दावा है कि उन्होंने एक नवीन तकनीक खोजी है। इसीलिए यह संभव हो पाया है।

कंपनी ने बताया कि पारे के समस्थानिक 198 पर उच्च-ऊर्जा न्यूट्रॉनों की बमबारी की जाती है। इस प्रतिक्रिया से पारा 197 उत्पन्न होता है, जो रेडियोधर्मी होते हुए भी धीरे-धीरे क्षय होकर एक स्थिर सोना 197 बनाता है। गौरतलब है कि सोना 197 प्रकृति में पाया जाता है।

कंपनी का कहना है कि एक गीगावाट का संलयन संयंत्र प्रति वर्ष कई टन सोना पैदा कर सकता है। स्विट्जरलैंड के जिनेवा के पास सर्न के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर के वैज्ञानिकों ने उप-परमाणु कणों को आपस में टकराकर थोड़ी मात्रा में सोना बनाने में सफलता प्राप्त की है। एलिस प्रयोग से चार वर्षों में केवल 29 पिकोग्राम सोना ही प्राप्त हुआ! इसलिए वैज्ञानिक कैलिफ़ोर्नियाई कंपनी के दावों को नकार नहीं रहे हैं।

संलयन तकनीक अभी प्रायोगिक चरण में है। एक ब्रिटिश कंपनी ने भी प्रयोगशाला में थोड़ी मात्रा में सोना उत्पादित किया है। वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि 2040 तक इस प्रयोगशाला में सोना उत्पादित किया जा सकेगा। इस विधि से उत्पादित सोना शुरू में रेडियोधर्मी कचरे के रूप में रहेगा। उपयोग में आने से पहले इसे लंबे समय तक सड़ने और सुरक्षित रखने की आवश्यकता होती है, जो उच्च लागत और तकनीकी जटिलता से जुड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पारे से सोना उत्पादित करना अभी लाभदायक और व्यावहारिक नहीं होगा। यह बहुत महंगा और समय लेने वाला है।