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असम में सबसे बड़ी बुलडोजर कार्रवाई में चौदह सौ परिवार विस्थापित

बनेगा अडाणी का पावर प्लांट, लोगों का पथराव

  • धुबरी अभियान को अमानवीय और क्रूर बताया

  • अखिल गोगोई को हिरासत में लिया गया

  • मतदाता सूची से विदेशी होंगे बेनकाबः सरमा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी:असम सरकार ने लोगों को बेदखल करने की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान सरकारी अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा। सरकार ने धुबरी जिले में एक प्रस्तावित थर्मल पावर प्लांट के लिए लगभग 1,400 परिवारों को 3,500 बीघा जमीन से बेदखल कर दिया।

चारु आबाखरा, संतोषपुर और चिरकुटा खंड 1 के तीन गांवों में चलाया गया यह सरकारी अभियान सुबह शुरू हुआ। इसी दौरान दोपहर के समय तब हिंसा भड़क उठी, जब निवासियों ने एक बुलडोजर पर पत्थर और ईंटें फेंकनी शुरू कर दीं। इसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों के अनुसार पत्थरबाजी में दो उपकरण टूट गए। असम के शिवसागर से विधायक और रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई भी घटनास्थल पर पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बेदखली की कार्रवाई को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए गोगोई ने कहा, करीब 3500 बीघे में फैली इस जमीन पर 1400 परिवारों का घर था। ये जमीन  है।।

असम में  का मतलब उस जमीन से है जो सरकार के अधीन होती है, लेकिन सरकार ने उसे किसी संस्था या व्यक्ति को अलॉट नहीं किया होता है। धुबरी में मौजूद इस जमीन पर ज्यादातर बंगाली बोलने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग रहा करते थे। इस मामले पर जानकारी देते हुए धुबरी के डिप्टी कमिश्नर दिबाकर नाथ ने बताया, असम सरकार द्वारा चलाया गया यह चौथा ऐसा अभियान है। गोलपाड़ा, नलबाड़ी और लखीमपुर में भी इसी तरह की बेदखली की गई है। कुल मिलाकर 2,300 से ज्यादा परिवार विस्थापित हुए हैं।

दूसरी ओर डीसी धुबरी ने बताया कि इन लोगों के मामले में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा और उन्हें जमीन या पैसा दिया जाएगा। बाकी लोग जिन्होंने अतिक्रमण किया है, उन्हें प्रति परिवार 50,000 रुपये दिए गए हैं। डीसी ने बताया कि सरकार ने बैजर अल्गा गांव में 300 बीघा जमीन आवंटित की है, जहां बेदखली के बाद भूमिहीन हो जाने वाले लोग जाकर कब्जा कर सकते हैं। असम यूनाइटेड सिटिज़न्स कन्वेंशन (एयूसीसी) ने गुरुवार को धुबरी ज़िले के चाप राजस्व क्षेत्र में हाल ही में हुए बेदखली अभियान की कड़ी निंदा की। एयूसीसी का दावा है कि इस अभियान के कारण हज़ारों किसान और मज़दूर बेघर हो गए हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को ऑल बीटीसी माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएमएसयू) के एक छात्र नेता की विवादास्पद टिप्पणी की कड़ी निंदा की और आगाह किया कि चुनावी रिकॉर्ड में असमिया की जगह बंगाली भाषा का इस्तेमाल करने से राज्य में विदेशियों की संख्या का पता चलेगा। सरमा ने कहा, भाषा ब्लैकमेल का हथियार नहीं बन सकती।

मुख्यमंत्री की यह कड़ी प्रतिक्रिया एबीएमएसयू कार्यकर्ता मैनुद्दीन अली द्वारा 9 जुलाई को बेदलांगमारी (कोकराझार) में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए उस सुझाव के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि बंगाली भाषी मुसलमान अब सार्वजनिक दस्तावेजों में बंगाली भाषा का इस्तेमाल करेंगे, न कि असमिया भाषा का। अली ने दावा किया कि असमिया अब राज्य की बहुसंख्यक भाषा नहीं रही।