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एसकेएम ने 9 जुलाई को आंदोलन की घोषणा की

केंद्र की किसान विरोधी नीतियों का फिर होगा विरोध

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाद: संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 540 किसान संगठनों के साथ मिलकर केंद्र की किसान विरोधी और मजदूर वर्ग विरोधी नीतियों के खिलाफ 9 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। यह घोषणा अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री और एसकेएम के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य वड्डे सोभनद्रीश्वर राव ने गुरुवार, 3 जुलाई को बशीरबाग प्रेस क्लब में की।

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए राव ने कहा कि मोदी सरकार का ट्रंप प्रशासन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने का कदम भारत के कृषक समुदाय के लिए खतरे की घंटी है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र अमेरिका से कृषि उपज पर आयात शुल्क हटाने की योजना बना रहा है।

इससे कीमतों में कमी आने की अच्छी तस्वीर मिल सकती है, लेकिन वास्तव में इससे कॉरपोरेट दिग्गजों को फायदा होता है। उन्होंने कहा, केवल कृषि किसान ही नहीं, बल्कि डेयरी किसान भी मुक्त व्यापार समझौते से बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि खेती में संकट का सबसे बड़ा कारण किसानों को उनकी फसलों के लिए दिया जाने वाला कम न्यूनतम समर्थन मूल्य है।

उन्होंने कहा, जब तक सरकारें हरित क्रांति के जनक डॉ एमएस स्वामीनाथन द्वारा सुझाए गए सी2 जोड़ पचास प्रतिशत फॉर्मूले को लागू नहीं करती हैं, जिसमें किसानों को फसल उगाने की लागत से 50 प्रतिशत अधिक भुगतान किया जाता है, तब तक समस्याएं खत्म नहीं होंगी।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए राव ने कहा कि 2000 से 2017 के बीच भारतीय किसानों को लगभग 45 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि उन्हें उचित एमएसपी नहीं मिला। उन्होंने कहा, 2020 से 2023 के बीच उन्हें इसी कारण से 9 लाख करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ।

कृषि ऋण पर राव ने आरोप लगाया कि 40 प्रतिशत किसान, 90 प्रतिशत काश्तकार किसानों को ऋण स्वीकृत नहीं हो पाता। उन्होंने कहा, इससे उन्हें साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है, और अक्सर वे इसे चुका नहीं पाते। उन्होंने मोदी सरकार पर किसानों के साथ सौतेला व्यवहार करने और 8,000 कॉरपोरेट्स के 25 लाख करोड़ रुपये के खराब ऋणों को माफ करने का आरोप लगाया।