अपने लोग हैं, स्वेच्छा से लौटेंगेः राजनाथ सिंह
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओके) के लोग भारतीय परिवार का हिस्सा हैं और भौगोलिक और राजनीतिक रूप से अलग होने के बावजूद वे किसी दिन स्वेच्छा से भारत की मुख्यधारा में लौट आएंगे। मेरा मानना है कि पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) के लोग हमारे परिवार का हिस्सा हैं।
हम एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प के लिए प्रतिबद्ध हैं और हमें पूरा विश्वास है कि हमारे भाई, जो आज भौगोलिक और राजनीतिक रूप से हमसे अलग हैं, एक दिन अपनी अंतरात्मा की आवाज पर चलकर भारत की मुख्यधारा में लौट आएंगे…वहां (पीओके में) ज्यादातर लोग भारत के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।
भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2025 में श्री सिंह ने कहा, केवल कुछ मुट्ठी भर लोगों को गुमराह किया गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा प्रेम, एकता और सच्चाई के मार्ग का अनुसरण किया है। भारत के साथ पीओके का एकीकरण इस देश की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक समृद्धि पर निर्भर करता है, उन्होंने कहा।
यह कहते हुए कि भारत ने आतंकवाद के प्रति अपनी रणनीति और प्रतिक्रिया को फिर से परिभाषित किया है, श्री सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ भविष्य की वार्ता पूरी तरह से आतंकवाद और पीओके पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा, पाकिस्तान को अब एहसास हो गया है कि आतंकवाद का कारोबार लागत प्रभावी नहीं है और इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर श्री सिंह ने कहा कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक निर्माता और निर्यातक के रूप में उभरा है। मेक इन इंडिया के जरिए, स्वदेशी रूप से बनी हर चीज पर प्रीमियम होगा उन्होंने कहा कि इससे हमारे देश में समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि मेक इन इंडिया भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अनिवार्य घटक है।
सफल ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा, अगर हमारे पास यह क्षमता नहीं होती, तो भारतीय सेना पाकिस्तान के सुदूर कोने से लेकर पीओके तक आतंकवाद के खिलाफ इतनी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती। उन्होंने कहा कि भारत न केवल लड़ाकू जेट और मिसाइल सिस्टम बना रहा है, बल्कि नए जमाने की युद्ध तकनीक की भी तैयारी कर रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए कुछ दिन पहले मंजूर किए गए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट के तहत पांच प्रोटोटाइप विकसित करने की योजना थी, जिसके बाद सीरीज प्रोडक्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार निजी क्षेत्र को इस तरह की बड़ी परियोजना में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ भाग लेने का अवसर मिलेगा।
हमारा रक्षा उत्पादन लगभग एक दशक पहले के 43,746 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जिसमें हमारे निजी क्षेत्र का योगदान 32,000 करोड़ रुपये से अधिक है। हमारा रक्षा निर्यात – जो एक दशक पहले 1,000 करोड़ से भी कम था – आज 23,500 करोड़ का हो गया है। श्री सिंह ने कहा, न केवल हथियार, बल्कि सिस्टम, सब-सिस्टम, घटक और सेवाएँ भी 100 से अधिक देशों को निर्यात की जा रही हैं।