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फिर टला दिल्ली के मेयर का चुनाव, कार्यवाही स्थगित

  • मनोनित सदस्यों के मतदान का विरोध

  • पहले दो बार भी इसी तरह हुआ था हंगामा

  • आप ने सुप्रीम कोर्ट जाने का एलान कर दिया

नयी दिल्ली: दिल्ली नगर निगम के लिए महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव लगातार तीसरी बार टल गया और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी। दिल्ली नगर निगम में सोमवार को हंगामे की वजह से महापौर का चुनाव टालना पड़ा।

फिलहाल, अगली तारीख तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी है। इससे पहले, दिल्ली नगर निगम के मेयर पद के लिए सोमवार को एक बार फिर से कवायद शुरू हुई।

सदन की बैठक शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने एलान किया है कि महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव एक साथ होंगे और इसमें नामित सदस्य भी मतदान में हिस्सा लेंगे।

नामित सदस्यों के मतदान में हिस्सा लेने की घोषणा के बाद आम आदमी पार्टी ने हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा और आप के सदस्यों की ओर से नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित की गयी।

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा शुरू हो गया जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। उल्लेखनीय है कि निगम के 250 वार्डों में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 15 साल से दिल्ली नगर निगम में काबिज भाजपा को हराकर 134 वार्डों में जीत दर्ज की थी जबकि भाजपा को 104 वार्ड में जीत मिली थी।

इस बार कांग्रेस के नौ पार्षद जीतकर आए हैं जबकि तीन ने निर्दलीय जीत हासिल की है। इससे पहले छह जनवरी को दिल्ली नगर निगम के महापौर के चुनाव से पहले निगम पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में जबरदस्त हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। दूसरी बार सदन की बैठक 24 जनवरी को हुई, जिसमें पार्षदों ने शपथ ली लेकिन मेयर का चुनाव हंगामे की भेंट चढ़ गया था।

अब आम आदमी पार्टी ने बार बार भाजपा की तरफ से हो रही ऐसी कार्रवाई के विरोध में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का एलान किया है। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि पीठासीन अधिकारी भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। मनोनित सदस्यों को मतदान का अधिकार पहले कभी नहीं रहा है।

इस बार किसी तरह भाजपा का मेयर बनाने की जुगत में भाजपा ऐसे हथकंडे अपना रही है। आज यह काम होना था, यह भाजपा ने पहले ही तय कर लिया था। इसी वजह से इस चुनाव के लिए होने वाले मतदान में भाजपा के कई सांसद आये भी नहीं थे। इससे साफ है कि यह सब सोची समझी साजिश थी। इसलिए पार्टी अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किसी जज की निगरानी में यह मतदान कराने की मांग को लेकर याचिका दायर करेगी।