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झारखंड के नये डीजीपी के लिए नामों की चर्चा

  • सरकार ने केंद्र को भेजा है नामों का पैनल

  • वहां बैठक में नाम तय कर लौटाये जाएंगे

  • हेमंत की सोच को ही प्राथमिकता मिलेगी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः राज्य का अगला डीजीपी कौन होगा, इस रस्साकसी में राज्य की अफसरशाही की राजनीति भी जाहिर होने लगी है। यूं तो यहां भी बिहार और उत्तरप्रदेश की तर्ज पर जातिगत राजनीति का बोलबाला है लेकिन इसके अलावा भी कौन किसके समर्थक हैं या किस अफसर के पीछे कौन कौन से नेता खड़े हैं, यह सवाल भी अब उजागर होने लगा है।

पहले ब्यूरोक्रेसी में इस किस्म की दखलंदाजी होती तो थी पर इतनी उजागर नहीं होती थी। झारखंड के वर्तमान डीजीपी नीरज सिन्हा का कार्यकाल आगामी 11 फरवरी 2023 को समाप्त हो रहा है। इसी वजह से नये डीजीपी के नाम के चयन की प्रक्रिया तेज हो गयी है। राज्य सरकार ने इसके लिए पहले ही यूपीएससी को नामों का एक पैनल भेजा है।

खबर है कि इस मुद्दे पर आगामी 11 जनवरी को यूपीएससी की बैठक में वरीयताक्रम पर विचार किया जाएगा। बैठक में  झारखंड सरकार की ओर से मुख्य सचिव सुखदेव सिहं भी शामिल होंगें। मिल रही जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने नये डीजीपी के लिए नौ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी है जिसमें एस एन प्रधान , अजय भटनागर, अजय सिंह, अनुराग गुप्ता, अनिल पालटा , आर के मल्लिक , मुरारीलाल मीणा , प्रशांत सिहं , एम एस भाटिया आदि नाम शामिल है।

यूपीएससी वरीयता व अन्य मापदंडों पर विचार कर तीन नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगी। उनके बाद का काम राज्य सरकार का होगा। वैसे इस पद के चयन की अंतिम जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है। इसलिए पैनल में उल्लेखित कुछ नाम शायद हेमंत के विचार में भी शामिल नहीं होंगे। जिसका कारण सर्वविदित है।

इनमें अनुराग गुप्ता का नाम सबसे प्रमुख है जो रघुवर दास के करीबी होने का लेबल अपने ऊपर लगा चुके हैं। इस वजह से हेमंत सोरेन का खेमा उनके अलावा कुछ अन्य नामों पर विचार भी नहीं करेगी। फिलहाल प्रदेश की राजनीति जिस दिशा में बह रही है, उससे इस बात का भी अनुमान लगाया जा सकता है कि ओबीसी कोटा को ही इसमें प्रमुखता मिलेगी और वैसी स्थिति में किसी जूनियर अफसर को भी डीजीपी का पद मिल सकता है।

यह राज्य सरकार के मुखिया पर निर्भर करता है कि वह अपने तरीके से राज्य की विधि व्यवस्था की देखरेख की जिम्मेदारी किसे सौंपना चाहता है। याद दिला दें कि पूर्व में एमवी राव को राज्य का डीजीपी बनाया गया था। हेमंत सोरेन के काफिला को हरमू बाई पास के किशोरगंज में रोके जाने तथा वहां हंगामा होने के बाद श्री राव सरकार की नजरों में चढ़ गये थे। उसके बाद नीरज सिन्हा को राज्य का डीजीपी बनाया गया था। सरकार ने उन्हें अपने विवेक से एक्सटेंशन भी दिया था। इसलिए आगे का फैसला भी हेमंत सोरेन की मर्जी पर निर्भर करेगा।