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एक मोड़ आय़ा मैं उत्थे दिल छोड़ .. .. .. ..

हम सभी उकताए हुए थे। एक लाख करोड़, दो लाख करोड़ पता नहीं कितने जीरों वाले घोटाले थे। डॉ मनमोहन सिंह वाली सरकार के राज में। लगता था सारा कुछ यही लोग लूट रहे हैं। इसलिए जब माहौल बना तो सभी ने जमकर कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। जब संसद के अंदर जा रहे थे तब भी माहौल बनाया गया। दरवाजे पर मत्था टेककर अंदर प्रवेश किया मानो लोकतंत्र का इससे बेहतर प्रहरी कोई नहीं हो सकता। आते ही चेतावनी दी कि ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा। सभी को लगा कि अब शायद देश सही रास्ते पर आ जाएगा।

आज के दौर में लगता है कि हम जहां दिल छोड़ आये थे, वहां से कहीं और भटक गये हैं। लोकतंत्र के मंदिर में माथा टेककर प्रवेश करने वाला आज विरोध का स्वर सुनना नहीं चाहता है। दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर कल देर रात तक कनॉट प्लेस में यही रुख देखने को मिला। उनके खासम खाम ज्ञानेश कुमार को भी लग रहा है कि पहली बार ऊंट पहाड़ के नीचे आ रहा है। लोग गड़े मुर्दे उखाड़ने लगे तो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का नाम फिर से लिया जाने लगा है। देश के नये तेलचट्टों को हल्के में लेना भारी पड़ गया है। वे इस कदर अड़े हुए हैं कि सांसदों और विधायकों को डराने धमकाने वाला फार्मूला भी काम नहीं आ रहा है।

इसी बात पर एक चर्चित फिल्म गदर का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था उत्तम सिंह ने और संगीत में ढाला था आनंद बक्षी ने। इसे उदित नारायण ने स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं। मैं निकला ओ गद्दी लेके

ओ हो हो हो ओ हो हो हो हो आ हा हा हा आ हा हा हा

मैं निकला ओ गद्दी लेके ओ रास्ते पर ओ सड़क मे

एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छोड़ आया

एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छ्चोड़ आया

रब जाने कब गुजरा अमृतसर, ओ कब जाने लाहोर आया

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (ये ये हे)

एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छोड़ आया

उस मोड़ पे वो मुटियार मिली

उस मोड़ पे वो मुटियार मिली, जट्ट यमला पागल हो गया

उसकी ज़ुल्फो की छाव मे, मैं बिस्तर डालके सो गया

ओ जब जगा मैं भगा, सब फाटक सब सिग्नल मैं तोड़ आया

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (ये ये हे)

ओ एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छोड़ आया (ये ये हे)

बस एक नज़र उसको देखा

बस एक नज़र उसको देखा दिल मे उसकी तस्वीर लगी

क्या नाम था उसका रब जाने, मुझको रांझे की हीर लगी

ओ मैने देखा एक सपना संग उसके नाम अपना मैं जोड़ आया

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (ये ये हे)

एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छोड़ आया

हो ओ ओ हो ओ ओ

हो ओ ओ हो ओ ओ

ला ला ला ला ला

हो ओ ओ

ला ला ला ला ला

आ हा हा ओ हो हो आ (ला ला ला ला ला)

ओ शर्माके वो यू सिमट गयी

शर्माके वो यू सिमट गयी

जैसे वो नींद से जाग गयी

मैने कहा गल सुन ओ कूडीए, वो दर्र के पीछे भाग गयी

वो समझी ओ घर उसके, चोरी से ओ चुपके से कोई चोर आया

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (ये ये हे)

एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छोड़ आया (एक मोड़ आया, मैं उठे दिल छोड़ आया)

मैं निकला ओ गद्दी लेके, ओ रास्ते पर ओ सड़क मे एक मोड़ आया

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (ये)

एक मोड़ आया (एक मोड़ आया)

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (मैं उत्थे दिल छोड़ आया)

हो एक मोड़ आया (हो एक मोड़ आया)

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (मैं उत्थे दिल छोड़ आया)

अरे एक मोड़ आया (अरे एक मोड़ आया)

मैं उत्थे दिल छोड़ आया (मैं उत्थे दिल छोड़ आया)

अब उस मोड़ से गाड़ी अचानक रास्ता बदलकर इधर पहुंच जाएगी, यह तो सोचा नहीं गया था। लिहाजा इसकी तैयारी भी नहीं थी। बार बार पुलिस का भय दिखाकर युवाओं को डराने का खेल उल्टा पड़ रहा है। भले ही मोदी जी की सरकार को इसका एहसास ना हो लेकिन जमीन से जुड़े भाजपा नेता भी अच्छी तरह इस बात को समझ रहे हैं कि गाड़ी पटरी से उतर चुकी है और उल्टी सड़क पर यह कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती है।

ऊपर से अब गोदी मीडिया वालों की अलग से शामत है क्योंकि भीड़ के अंदर चैनल का लोगो देखकर ही लोग उन्हें चिढ़ाने लगे हैं। गनीमत है कि दूसरे चेहरे यहां हैं पर टीवी चैनल के स्टूडिया में बैठकर मोदी का गुणगान करने वाले अगर भीड़ में फंस जाते तो लोग सारा गुस्सा ही उनपर निकाल देते।