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सीईसी ज्ञानेश कुमार की एक और परेशानी आने वाली है

केरलम विधानसभा में हटाने का प्रस्ताव

यूडीएफ और एलडीएफ दोनों पक्ष में

प्रस्ताव पारित होने मे दिक्कत नहीं

वहां भाजपा के सिर्फ तीन विधायक है

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरलम की कांग्रेस सरकार सोमवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करेगी, जिसमें केंद्र सरकार से ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने का आग्रह किया जाएगा। इसके साथ ही, केरलम विधानसभा देश की ऐसी पहली विधानसभा बन जाएगी जो मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर कोई प्रस्ताव ला रही है।

विधानसभा के बुलेटिन के अनुसार, यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन द्वारा पेश किया जाएगा। पिछले साल सितंबर में, तत्कालीन वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की सरकार द्वारा लाए गए एसआईआर को लागू करने के खिलाफ राज्य विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था। 16वीं विधानसभा का दूसरा सत्र सोमवार से शुरू हो गया।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग के अलावा, विधानसभा में पेश किए जाने वाले प्रस्ताव में यह भी मांग की जाएगी कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में विसंगतियों को दूर करने के बाद, उन सभी पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकारों को बहाल किया जाए जिन्हें मतदाता सूची से हटा दिया गया है। तीसरी मांग चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए बनाई जाने वाली समिति का पुनर्गठन करने की होगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए।

140 सदस्यों वाली विधानसभा में, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के पास 102 सदस्य हैं, जबकि CPI(M) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के पास 35 विधायक हैं। भाजपा के तीन विधायक हैं। चूँकि कांग्रेस और माकपा दोनों ही राष्ट्रीय अभियान और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं, इसलिए इस प्रस्ताव के विधानसभा में पारित होने की उम्मीद है। अतीत में ऐसे कई उदाहरण आए हैं जब केरलम विधानसभा ने माकपा और कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है कि चूंकि आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, इसलिए आयोग की साख को बहाल करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। इसमें आगे कहा गया, तकनीकी हेरफेर और अनियमितताओं के माध्यम से अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, हाशिए के वर्गों और युवाओं के मतदान के अधिकारों को छीनना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।