खास इलाकों के लोग सरपरस्तों को जान गये
मुहल्ला के लोगों को पूरी जानकारी है
राजनीतिक संरक्षण से हौसले बुलंद हैं
पुलिस के लोग भी नेताओँ को जानते हैं
राष्ट्रीय खबर
रांचीः राजधानी रांची के लगभग सभी इलाकों में प्रशासनिक सख्ती के तमाम दावों और कोशिशों के बावजूद नशे का अवैध कारोबार लगातार फैलता जा रहा है, जो अब अपराध की दुनिया की एक स्वाभाविक और चिंताजनक स्थिति बन चुका है। इसी नशे की गिरफ्त में आ चुके युवा अपनी लत को पूरा करने के लिए पैसों की खातिर चेन स्नेचिंग, मोबाइल छिनतई और अन्य आपराधिक वारदातों को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं। ये अपराधी आमतौर पर तेज रफ्तार वाली मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करते हैं और वारदात को अंजाम देने के बाद पलक झपकते ही उसी रफ्तार से फरार हो जाते हैं। कई बार मोबाइल या चेन स्नेचिंग के पीड़ित इतने सहम जाते हैं कि उन्हें भाग रहे वाहन का नंबर तक देखने का मौका नहीं मिलता।

इस समस्या का एक और गंभीर पहलू यह है कि शहर के रातू रोड और उसके आसपास के इलाकों में यह अवैध कारोबार अब धीरे-धीरे एक संगठित अपराध का रूप अख्तियार करता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान हुई अनेक घटनाओं से यह साफ हो गया है कि किस तरह गिरोहबंदी के जरिए आम लोगों को डराने, धमकाने और जबरन रंगदारी वसूलने का खेल चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन गिरोहों और आपराधिक गतिविधियों में शामिल युवकों को स्थानीय मुहल्ले के लोग भली-भांति पहचानते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इन असामाजिक तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है, जिसका उत्तर अब धीरे-धीरे जनता के बीच भी खुलकर सामने आने लगा है।
भले ही पुलिस प्रशासन को इस नेटवर्क की पूरी जानकारी हो या न हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर दो खास नेताओं के नाम इसके लिए पूरी तरह पहचाने जा चुके हैं। इन दोनों नेताओं की संलिप्तता और वास्तविक भूमिका तब और अधिक उजागर होती है जब पुलिस इन बदमाशों की तलाश करती है या फिर इनमें से कोई आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ जाता है। भुक्तभोगियों और स्थानीय जानकारों की मानें तो अपनी राजनीतिक हसियत और धौंस जमाने के लिए विभिन्न दलों के ये युवा नेता इन्हीं नशेड़ी और शातिर युवकों का इस्तेमाल करते हैं। स्थिति यह है कि कई बार राजनीतिक रैलियों या विरोध प्रदर्शनों के दौरान दूसरों के लिए जबरन भीड़ जुटाने और सुनियोजित तरीके से नारेबाजी करने का जिम्मा (टेंडर) भी इसी गिरोह के हवाले कर दिया जाता है, जिसके दम पर इनका अवैध कारोबार बेधड़क चल रहा है।
हालांकि, कुछ पुलिसकर्मियों को भी इस पूरे धंधे और इसे संरक्षण देने वाले चेहरों की पूरी जानकारी है, लेकिन उच्च स्तर से किसी प्रकार का ठोस आदेश या हरी झंडी न मिलने के कारण वे इस गर्म लोहे पर हाथ डालने से परहेज कर रहे हैं, जिससे अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।