झूठे बयान दर्ज करने का मामला पकड़ा गया
आईआरएस अफसर का मामला है यह
अफसरों ने इसकी झूठी शिकायत की थी
केस का सारा दावा झूठा साबित हो गया है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के छह अधिकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अदालत के समक्ष सरकार के साथ पत्राचार के बारे में झूठा बयान देने के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी को बरी किए जाने को चुनौती देने के दौरान का है।
न्यायमूर्ति मधु जैन ने पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की एक याचिका को स्वीकार करते हुए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश को सीबीआई अधिकारियों- सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 191 (झूठा साक्ष्य देना), 193 (झूठा साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए दंड) और 209 (अदालत में कपटपूर्वक या बेईमानी से झूठा दावा करने के लिए दंड) के तहत इन अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में एक उचित आधार मौजूद है।
उच्च न्यायालय ने अपने 6 अक्टूबर के आदेश में कहा, इसके द्वारा विद्वान विशेष न्यायाधीश को निर्देश दिया जाता है कि वे सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ धारा 193 के साथ पठित धारा 191 आईपीसी और धारा 209 आईपीसी के तहत दंडनीय कथित अपराधों के लिए लिखित शिकायत दर्ज करें, और इस फैसले की प्राप्ति की तारीख से चार सप्ताह के भीतर इसे संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट को प्रेषित करें।