हिंदपीढ़ी में जमीन बेचने की जालसाजी
असली विक्रेता तमाड़ में बैठा हुआ है
कोर्ट में केस होने के बाद भी बिक्री
बैंक खाता से पैसा लेकर हड़प गया
राष्ट्रीय खबर
रांचीः हिंदपीढ़ी की एक जमीन का म्यूटेशन वाकई हैरान करने वाला है। चौबीस घंटे के भीतर यह काम सरकारी कामकाज की गति को दर्शाता है। लेकिन असली पेंच इस बात का है कि एक ही जमीन को आखिर कितनी बार बेचा गया और अदालत में मामला लंबित होने के बाद भी आखिर सरकारी स्तर पर यह घपला किसके इशारे पर किया गया। यह मामला हिंदपीढ़ी थर्ड स्ट्रीट की एक जमीन का है। जमीन के मूल मालिक देवाशिष चौधरी को यह जमीन विरासत में मिली थी। किसी पारिवारिक जरूरत की बात कहकर उन्होंने यह जमीन किसी को बेचना तय किया। यह साठ लाख रुपये में तय की गयी थी। इस करार के एवज में देवाशिष चौधरी ने अपने बैंक खाता में उल्लेखित अग्रिम का आठ लाख रुपया भी प्राप्त किया था। रजिस्ट्री दस्तावेजों के मुताबिक इस जमीन की विधिवत बिक्री की रजिस्ट्री भी वर्ष 2015 में हो चुकी थी।

इसके बाद चुपके चुपके उसी जमीन मालिक ने किसी और को यह जमीन बेच दी। जमीन का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बीच ही चुपके से किये गये एग्रीमेंट की बदौलत रातों रात जमीन पर कब्जा भी कर लिया गया। जिसकी तरफ से अपराधी किस्म के लोग वहां आकर लोगों को धमकाने लगे। मामले की जानकारी जब हिंदपीढ़ी थाना को दी गयी तो पहले तो थानेदार ने केस दर्ज करने में आनाकानी की। कुछ दिनों के बाद आने की बात कहकर वह इसे टाल गये। कुछ दिनों के बाद जब दोबारा उनके संपर्क किया गया तो वह पीड़ित पक्ष पर ही भड़क गये और जालसाजी कर जमीन हड़पने का आरोप लगाने लगे। पुलिस उच्चाधिकारियों से भी थाना प्रभारी के इस आचरण की शिकायत की गयी है कि उनकी बातचीत का लहजा बिल्कुल गुंडे की तरह है। ऐसा लगता है कि पुलिस उच्चाधिकारियों ने इस शिकायत पत्र पर कार्रवाई करते हुए मामले में सीआईडी जांच के आदेश दिये हैं और सीआईडी में भी इसका केस दर्ज किया गया है, जिसका नंबर 11868/2026 है।
लेकिन जिस विक्रेता यानी देवाशिष चौधरी ने यह जालसाजी की है, वह पूरे सीन से ही गायब हो गया है। किसी और के साथ करार करने के तुरंत बाद ही सीओ कार्यालय ने इतनी जल्दबाजी में म्यूटेशन कैसे कर दिया, यह अपने आप में पूरे मामले में गड़बड़ी होने का संकेत देता है। वरना आम तौर पर लोगों को अपनी जमीन का म्यूटेशन कराने में जूते घिस जाते हैं। इधर जमीन की दो बार बिक्री होने के बाद असली विक्रेता यहां से गायब होने के बाद तमाड़ में बैठा हुआ है।