बिना किसी शोर शराबे के रुइया समूह ने चाल चली
डोनाल्ड ट्रंप से जाकर मिले उद्योगपति
मेसाबी मेटालिक्स पहले ही उसकी कंपनी
पिता और पुत्र दोनों ह्वाइट हाउस गये
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में एक बड़े और ऐतिहासिक निवेश की घोषणा करते हुए दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आधिकारिक रूप से यह ऐलान किया है कि भारत का प्रमुख बहुराष्ट्रीय व्यावसायिक समूह एस्सार ग्रुप संयुक्त राज्य अमेरिका के आयोवा राज्य में 15 अरब डॉलर की भारी-भरकम लागत से एक विशाल स्टील कॉम्प्लेक्स का निर्माण करेगा।
इस बड़ी परियोजना का विकास एस्सार समूह के स्वामित्व वाली अमेरिकी कंपनी मेसाबी मेटालिक्स द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस निवेश को अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग) के लिए एक अभूतपूर्व बढ़ावा करार दिया है और इसे अमेरिकी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बताया है। व्हाइट हाउस में आयोजित इस विशेष घोषणा कार्यक्रम के दौरान एस्सार समूह के सह-संस्थापक रवि रुइया और उनके बेटे तथा मेसाबी मेटालिक्स के चेयरमैन रेवंत रुइया भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों और अमेरिकी प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस विशालकाय स्टील प्लांट के निर्माण से अमेरिका में विनिर्माण उद्योग को एक नई रफ्तार मिलेगी और यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से एकीकृत अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला को पूरा करने में मददगार साबित होगा।
इस परियोजना के तहत लगभग 2030 तक पूर्ण उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, और यह आधुनिक प्लांट सालाना लगभग 1 करोड़ टन स्टील का उत्पादन करेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से आयोवा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर हजारों की संख्या में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, इस पूरी परियोजना के तहत एस्सार ग्रुप अमेरिका में कुल मिलाकर लगभग 18 अरब डॉलर का व्यापक निवेश कर रहा है, जिसमें मिनियापोलिस और अन्य क्षेत्रों में कच्चे माल व खदानों से जुड़े विकास कार्य भी शामिल हैं।
एस्सार समूह के चेयरमैन रेवंत रुइया ने अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण संस्कृति को फिर से बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विजन की सराहना की और उनका आभार व्यक्त किया। अमेरिकी वाणिज्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का यह मानना है कि यह निवेश अमेरिका की वर्तमान व्यापार नीतियों और टैरिफ सुधारों का एक सकारात्मक परिणाम है, जिसके कारण वैश्विक कंपनियां अमेरिकी धरती पर बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और औद्योगिक जगत में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग के एक नए अध्याय की चर्चा जोरों पर है।