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महिलाओँ को स्वतंत्रता का पूर्ण अधिकारः राहुल

पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में बोले नेता प्रतिपक्ष

कार्यक्रमों में लड़कियों को जबर्दस्त मौजूदगी

बिल्कुल दूसरे तरीके से पेश किया कार्यक्रम

महिलाओँ को सामाजिक पिंजरे को तोड़ना होगा

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में पुणे में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम छात्रों की गूँज के दौरान देश में महिलाओं की स्थिति, उनके अधिकारों और सामाजिक ढांचे पर अत्यंत महत्वपूर्ण और बेबाक विचार रखे। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की महिलाएं देश की रीढ़ और उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें एक ऐसी रूढ़िवादी सामाजिक व्यवस्था द्वारा व्यवस्थित रूप से सीमित और प्रतिबंधित किया जाता है जो उन्हें स्वतंत्र और आत्मनिर्भर नहीं देखना चाहती है।

गांधी ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को केवल बेटी, बहन, पत्नी और मां जैसी पारंपरिक और घरेलू भूमिकाओं तक ही सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि इन भूमिकाओं को निभाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन हर महिला की अपनी एक स्वतंत्र, मौलिक और व्यक्तिगत पहचान भी होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सबसे पहले खुद की अपनी मालिक है और यही उसकी सबसे प्राथमिक और असली पहचान है, जिसके बाद अन्य पारिवारिक रिश्ते आते हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने मनुस्मृति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक सामाजिक संरचना की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह पुरानी सोच महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सर्वांगीण प्रगति के मार्ग में एक बड़ी बाधा है। उन्होंने इस बात का आह्वान किया कि हमें इस दमनकारी और पितृसत्तात्मक विचारधारा के खिलाफ आवाज उठानी होगी और समाज द्वारा महिलाओं के इर्द-गिर्द बुने गए इस सामाजिक पिंजरे को पूरी तरह से तोड़ना होगा ताकि वे अपने जीवन के निर्णय खुद ले सकें।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश में महिलाओं के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों को रेखांकित करने के लिए कई चौंकाने वाले आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा की कमी, सामाजिक दबाव और उत्पीड़न के कारण लगभग पचास प्रतिशत महिलाओं को या तो रोजगार के अवसरों से वंचित होना पड़ता है या वे खुद काम करने से पीछे हट जाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने घरेलू हिंसा, शारीरिक उत्पीड़न, कन्या भ्रूण हत्या और संपत्ति में महिलाओं के अत्यंत कम मालिकाना हक जैसे गंभीर मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन रूढ़िवादी बाधाओं को पार किए बिना देश का वास्तविक विकास संभव नहीं है।