सुकमा के तुमलपाड़ में क्रेशर प्लांट और खदान के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, मनीष कुंजाम बोले— बिना ग्रामसभा हो रहा खनन
सुकमा (छत्तीसगढ़): सिलगेर-एल्मागुंडा सड़क निर्माण परियोजना के तहत सुकमा जिले के तुमलपाड़ गांव के समीप संचालित गिट्टी खदान और दो बड़े क्रेशर प्लांटों के विरुद्ध स्थानीय निवासियों एवं आदिवासियों का जनविरोध प्रचंड रूप ले चुका है।
ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से कहना है कि वे क्षेत्र के बुनियादी विकास या सड़क निर्माण के कतई विरोधी नहीं हैं, किंतु उनकी सदियों पुरानी धार्मिक आस्था से जुड़े पवित्र पहाड़ पर बिना विधिवत ग्रामसभा की पूर्व सहमति के खनन किया जाना उनके संवैधानिक अधिकारों, परंपराओं और विश्वास की सीधी अनदेखी है।
🛑 पूर्व विधायक मनीष कुंजाम पहुंचे तुमलपाड़ गांव, ग्रामीणों ने बताई 4 महीने से जारी वादाखिलाफी की दास्तान
रविवार को पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ आदिवासी नेता मनीष कुंजाम प्रभावित तुमलपाड़ गांव पहुंचे, जहां विशाल संख्या में एकत्रित ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्याओं एवं पीड़ा से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने एक स्वर में दोनों क्रेशर प्लांटों को तत्काल प्रभाव से बंद कराने और खदान पर रोक लगाने की मांग की। निवासियों ने बताया कि निर्माण कंपनी एवं ठेकेदारों ने गांव के सर्वांगीण विकास के नाम पर कई बड़े वादे किए थे, किंतु 4 महीने से अधिक समय बीत जाने के उपरांत भी एक भी वादा धरातल पर क्रियान्वित नहीं हुआ।
💬 “जबरन सरपंच-सचिव से लिखवा लिया गया प्रस्ताव, विरोध करने पर थाने में बिठाया”: मनीष कुंजाम
ग्रामीणों से विस्तृत चर्चा के उपरांत पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि, “क्षेत्र के आदिवासी विकास विरोधी नहीं हैं। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं हर अंदरूनी गांव तक पहुंचनी चाहिए, किंतु विकास की आड़ में यदि ग्रामसभा की संवैधानिक शक्ति, परंपराओं और अधिकारों को कुचला जाएगा तो विरोध होना स्वाभाविक है।”
कुंजाम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, “प्रारंभ में ग्रामीणों ने पहाड़ पर खनन की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया था। इसके बाद फर्जी तरीके से जबरन सरपंच और सचिव से प्रस्ताव लिखवा लिया गया। जब गांव के युवाओं ने इसका विरोध किया तो उन्हें पकड़कर सुरक्षा कैंप और जगरगुंडा थाने में रखा गया। ठेकेदार ने जो भी वादे किए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं किया गया है।”
🏫 स्कूल, आंगनबाड़ी और रोजगार का दिया गया था झांसा, अब तक नहीं मिली कोई बुनियादी सुविधा
गांव के सरपंच इरपा किष्टैया एवं ग्रामसभा की अध्यक्षता करने वाले कुहराम जोगा ने बताया कि शुरू में ग्रामीण खदान खोलने के पक्ष में कतई नहीं थे।
बाद में गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी, नलकूप, सड़क, खेतों की निशुल्क जुताई और प्रत्येक परिवार को आर्थिक सहायता देने के लुभावने आश्वासन दिए गए थे। गांव के 12वीं पास शिक्षित युवा सोयम रामबाबू ने बताया कि बीआरओ (BRO) से जुड़े ठेकेदारों ने उन्हें गांव में स्कूल खोलकर शिक्षक बनाने तक का भरोसा दिया था। किंतु खदान शुरू होने के बाद न स्कूल खुला, न आंगनबाड़ी बनी और न ही स्थानीय युवाओं को कोई रोजगार प्रदान किया गया।
🌾 ब्लास्टिंग से खेतों में गिर रहे बड़े-बड़े पत्थर, उड़ती धूल से चौपट हो रही किसानों की फसलें
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन कार्य का सीधा और भयानक असर उनकी कृषि एवं आजीविका पर पड़ रहा है।
गांव के किसान रमेश सोयम, सोयम एंका, सोढ़ी मंगो, माड़वी हांदा और माड़वी नंदा ने बताया कि उनके कृषि खेत पहाड़ के बिल्कुल समीप स्थित हैं। खदान में प्रतिदिन होने वाली हैवी ब्लास्टिंग से बड़े-बड़े पत्थर उड़कर उनके खेतों में आ गिरते हैं, जिससे खेती करना जानलेवा और असंभव होता जा रहा है। वहीं माड़वी हडमा का कहना है कि क्रेशर प्लांट से उठने वाली धूल और गिट्टी के बारीक कण फसलों पर जम रहे हैं, जिससे इस वर्ष धान व अन्य फसलें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं।
⚖️ बिना पर्यावरणीय एवं खनिज स्वीकृति के उत्खनन का आरोप, ग्रामीणों ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीआरओ के अधीन कार्यरत निजी निर्माण कंपनियों द्वारा तुमलपाड़ के घने जंगल क्षेत्र (कम्पार्टमेंट क्रमांक-475 की शासकीय भूमि) में खदान संचालित कर दो विशाल क्रेशर प्लांट स्थापित किए गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance), राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल तथा खनिज विभाग की आवश्यक अनुमतियों के अवैध रूप से पत्थर निकालकर सिलगेर-पूवर्ती, पूवर्ती-गोमगुड़ा, गोमगुड़ा-मेटागुड़ा और मेटागुड़ा-एल्मागुंडा सड़क परियोजनाओं में उपयोग किया जा रहा है। अब ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी धार्मिक आस्था और आजीविका पर प्रहार बंद नहीं हुआ तो वे जिला प्रशासन व न्यायालय के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।