रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण कर दिया
हरदीप सिंह पुरी के बयान का पोस्टमार्टम
माइलेज की कमी का घाटा ग्राहकों को हुआ
मालिकों ने 88,234 करोड़ अतिरिक्त खर्च किये
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः भारत सरकार द्वारा पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने के कुछ ही महीनों बाद, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में इन दावों को खारिज कर दिया कि एथेनॉल-मिश्रित ईंधन से गाड़ियाँ ज्यादा ईंधन जला रही हैं या उनके इंजनों को नुकसान पहुँच रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए पुरी ने जैव ईंधन से इंजनों को नुकसान पहुँचने की खबरों को स्पष्ट शब्दों में गलतबयानी बताया।
पुरी ने कहा कि किसी गाड़ी की ईंधन दक्षता में एक या दो प्रतिशत की गिरावट आने के पीछे 21 अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली या गुरुग्राम जैसी भारी यातायात और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर गाड़ियाँ चलाना, ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल की तुलना में ईंधन की अधिक खपत का अधिक संभावित कारण है।
हालाँकि, द रिपोर्टर्स कलेक्टिव द्वारा मोटर स्पिरिट (पेट्रोल व उसके मिश्रित वेरिएंट) की खपत और वाहनों की वृद्धि दर के आंकड़ों के आधार पर किए गए विश्लेषण में सरकार के दावों पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2026 के बीच इथेनॉल मिश्रण में आई तेजी के कारण घटे माइलेज की भरपाई के लिए भारतीय उपभोक्ताओं को लगभग 88,234 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं।
माइलेज में इस गिरावट का मुख्य कारण वैज्ञानिक तथ्य है: एथेनॉल जलने पर शुद्ध पेट्रोल की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत कम ऊर्जा देता है। हालाँकि सरकार ने एथेनॉल मिश्रण के माध्यम से कच्चे तेल के आयात बिल में बचत की है, लेकिन इस बदलाव का सीधा वित्तीय बोझ उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में, बिना एथेनॉल वाला शुद्ध पेट्रोल साधारण मिश्रित पेट्रोल (लगभग 102रुपये प्रति लीटर) की तुलना में 66-68 प्रति लीटर अधिक महंगा तय किया गया है (दिल्ली दरों के आधार पर), जिससे उपभोक्ताओं के पास कोई सस्ता विकल्प नहीं बचता।
इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत जनवरी 2003 में हुई थी, जिसका शुरुआती लक्ष्य 9 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 5 फीसद मिश्रण का था। 2013-14 तक यह मिश्रण केवल 0.1 से 1.5 फीसद के बीच सीमित रहा। वर्ष 2019 में इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया गया और पिछले तीन वर्षों में तेजी लाते हुए जुलाई में 20 प्रतिशत ब्लैंडिंग का स्तर हासिल कर लिया गया।