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चंडीगढ़ बैंक घोटाला: 657 करोड़ की धोखाधड़ी में CBI का बड़ा खुलासा, मास्टरमाइंड बना ब्रांच मैनेजर

हरियाणा में सामने आए लगभग 657 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा खुलासा किया है। सीबीआई ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी को इस पूरे षड्यंत्र का प्रमुख मास्टरमाइंड बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के कुछ अधिकारियों और बाहरी सहयोगियों ने सुनियोजित तरीके से बैंकिंग प्रणाली में हेरफेर कर सरकारी विभागों के खातों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की है।

📝 फर्जी चेक और नकली डेबिट नोट का ‘खेाल’

जांच में सामने आया है कि तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी, रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार और अन्य आरोपियों ने फर्जी डेबिट नोट, नकली हस्ताक्षर वाले चेक और बिना वैध चेक के अनधिकृत डेबिट एंट्री के जरिए रकम निकाली। इन लेन-देन को बैंक के आंतरिक “मेकर-चेकर” सिस्टम के माध्यम से मंजूरी दिलाई गई, ताकि ये पूरी तरह वैध बैंकिंग प्रक्रिया का हिस्सा लगें। यहाँ तक कि अनिवार्य कॉल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई थी।

🕵️ सरकारी विभागों को चूना लगाने का तरीका

आरोपियों ने धोखाधड़ी को छिपाने के लिए नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और ब्याज प्रमाणपत्र तक तैयार कर लिए थे। इसके अलावा, खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी को बदलकर आरोपियों ने अपने नियंत्रण वाले नंबरों पर ओटीपी और अलर्ट मंगवाए, जिससे विभाग के अधिकारियों को कानों-कान खबर नहीं हुई।

📉 प्रमुख सरकारी खातों में हुई धांधली

  • एचपीजीसीएल घोटाला: 5 मई 2025 को हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खाते से 50 करोड़ रुपये उन चेकों के जरिए निकाले गए, जो कभी जारी ही नहीं हुए थे।

  • पेंशन फंड में सेंध: दिसंबर 2025 में पेंशन फंड ट्रस्ट के 25 करोड़ रुपये ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नामक एक शेल कंपनी में स्थानांतरित किए गए।

  • कृषि विपणन बोर्ड: जनवरी 2026 में हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के खाते से 10 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी की गई।

⚠️ सिस्टम की खामियों का उठा फायदा

सीबीआई का मानना है कि यह घोटाला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं था। आरोपियों ने बैंक की तकनीकी खामियों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और आंतरिक नियंत्रण तंत्र में जानबूझकर सुनियोजित हेरफेर किया। नगर निगम पंचकूला के खातों में भी 22 फर्जी ट्रांजेक्शन पाए गए, जहाँ किसी भी अधिकृत व्यक्ति को एसएमएस अलर्ट नहीं गया। सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों और शेल कंपनियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।