हरियाणा के चर्चित 657 करोड़ के बैंक घोटाला में नई जानकारी
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः हरियाणा में हुए 657 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में जांच का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। मामले में नामजद 2011-बैच के सस्पेंड आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार के फरार होने की खबर ने हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा लगातार छापेमारी के बीच प्रदीप कुमार गायब हैं और उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है। वे अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं।
इस घोटाले में सीबीआई अब तक 2012-बैच के आईएएस राम कुमार सिंह और 2000-बैच के आईएएस पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरा घोटाला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और ए यू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों के फंड को निजी खातों में डायवर्ट करने के लिए रचा गया था। प्रवर्तन निदेशालय भी इस मामले में समानांतर जांच कर रहा है, जिसने घोटाले की राशि 645 करोड़ रुपये आंकी है।
प्रदीप कुमार की भूमिका मुख्य रूप से हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में हुए 169 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ी है। वे 31 अगस्त, 2022 से 10 दिसंबर, 2025 तक बोर्ड के सदस्य सचिव रहे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए बोर्ड की धनराशि को निजी बैंकों में निवेश करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया। सीबीआई ने हाल ही में बोर्ड के डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया था, जिसने खुलासा किया कि कैसे शेल कंपनियों (जैसे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज) के जरिए धन की हेराफेरी की गई।
इस मामले में कुल आठ आईएएस अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। इनमें से दो गिरफ्तार हो चुके हैं, एक फरार है और बाकी पांच भी गिरफ्तारी की कगार पर हैं। इतना ही नहीं, एचएसपीसीबी के पूर्व चेयरमैन और आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं। सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत उनके खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है।
प्रदीप कुमार को 8 अप्रैल को राम कुमार सिंह के साथ ही निलंबित कर दिया गया था। जांच एजेंसियों के लिए अब प्रदीप कुमार की तलाश एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि उनकी गिरफ्तारी इस घोटाले की कई और कड़ियों को खोल सकती है।