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जौनागिरी का सोना अब स्वदेशी बाजार में पहुंचा

चंद्राबाबू नायडू ने काम की औपचारिक शुरुआत की

राज्य के अपने सोना खदान से निकला

तीन अलग अलग किस्मों में बना है

राज्य के राजस्व में सुधार की उम्मीद

राष्ट्रीय खबर

अमरावतीः आंध्र प्रदेश ने अपने खनन और औद्योगिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। राज्य के कुरनूल जिले में स्थित जोंनागिरी स्वर्ण खदानों से उत्पादित पहला व्यावसायिक स्वर्ण—जोंनागिरी गोल्ड बिस्कुट—आधिकारिक रूप से बुलियन बाज़ार में उपलब्ध हो गया है। यह उपलब्धि न केवल आंध्र प्रदेश के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भारत के घरेलू स्वर्ण उत्पादन को मजबूती देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 24 जून को औपचारिक रूप से जियोमायसोर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उत्पादित इन 24-कैरेट स्वर्ण बिस्कुटों का पहला बैच कुरनूल के प्रमुख व्यापारियों को सौंपा। यह सोना जोंनागिरी खदानों से निकाले गए अयस्क से परिष्कृत किया गया है, जो राज्य की औद्योगिक क्षमता को प्रदर्शित करता है।

फिलहाल, जोंनागिरी गोल्ड बिस्कुट कुरनूल के ऐतिहासिक कोंडारेड्डी बुरुजु के पास स्थित प्रसिद्ध शराफ बाज़ार के चुनिंदा आभूषण विक्रेताओं के यहाँ बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। ग्राहकों की सुविधा के लिए ये बिस्कुट तीन अलग-अलग भार—50 ग्राम, 100 ग्राम और 500 ग्राम—में उतारे गए हैं।

इनमें 500 ग्राम के बिस्कुट ने अपनी विशिष्ट पहचान के कारण लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। इस स्वर्ण बिस्कुट पर न केवल आंध्र प्रदेश का नक्शा अंकित है, बल्कि उस पर जोंनागिरी गोल्ड माइन और 999 का हॉलमार्क भी खुदा हुआ है, जो इसके 99.9 प्रतिशत शुद्ध होने का प्रमाण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जोंनागिरी स्वर्ण खदानों का परिचालन शुरू होने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। भारत अपनी स्वर्ण खपत के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, ऐसे में जोंनागिरी से निकला स्वदेशी सोना देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। कुरनूल के व्यापारी इस नई उपलब्धि को लेकर बेहद उत्साहित हैं और आने वाले समय में इसे राज्य के अन्य हिस्सों और राष्ट्रीय बाज़ारों में भी विस्तार देने की उम्मीद जताई जा रही है।