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Beur Jail Corruption Case: पटना के बेऊर जेल में बड़ी कार्रवाई; सुपरिटेंडेंट समेत 7 अधिकारी सस्पेंड

पटना: पटना स्थित बेऊर जेल इन दिनों गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सुर्खियों में है। जेल प्रशासन पर बंदियों के शारीरिक-मानसिक शोषण और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए जेल सुपरिटेंडेंट नीरज कुमार झा समेत कुल सात अधिकारी और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

⚖️ किन अफसरों पर गिरी गाज?

जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:

  • नीरज कुमार झा (जेल सुपरिटेंडेंट): इन्हें भागलपुर स्थानांतरित किया गया है।

  • अजय कुमार (उपाधीक्षक): निलंबित कर सुपौल भेजा गया।

  • चार सहायक जेल अधीक्षक: शालिनी, अभिषेक कुमार, कुंदन कुमारी और मनीष ठाकुर को अलग-अलग जिलों में स्थानांतरित किया गया है।

  • एक उच्च कक्षपाल: इन्हें भी निलंबित कर दिया गया है। अब सहायक कारा महानिरीक्षक राजीव कुमार को बेऊर जेल का नया प्रभारी अधीक्षक बनाया गया है।

🔎 जांच में खुले जेल के काले कारनामे

कारा मुख्यालय और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई आठ घंटे की गहन छापेमारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • अवैध वसूली: जेल के अंदर सरसों तेल 400 रुपये लीटर और सब्जियां 150-200 रुपये किलो तक बेची जा रही थीं।

  • अमानवीय व्यवहार: प्रभावशाली बंदियों के माध्यम से नए और कमजोर बंदियों का शारीरिक-मानसिक शोषण किया जाता था।

  • सुविधाओं का खेल: पैसे देने वाले बंदियों को हीटर जैसी सुविधाएं दी जाती थीं, जबकि असमर्थ लोगों को सेल में प्रताड़ित किया जाता था।

  • भोजन की गुणवत्ता: कैदियों के लिए मिलने वाले भोजन के बजाय बाहर से अवैध खाना बेचने का रैकेट चल रहा था।

📱 कैसे पकड़ा गया खेल?

यह पूरा मामला ‘सहयोग पोर्टल’ के माध्यम से कैदियों द्वारा की गई शिकायतों के बाद उजागर हुआ। मामला सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचा, जिसके बाद आनन-फानन में जांच दल गठित किया गया। जांच में पाया गया कि ये अनियमितताएं कोई नई बात नहीं थीं, बल्कि एक लंबे समय से चली आ रही संगठित भ्रष्टाचार की व्यवस्था थी।