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Abhishek Banerjee vs NCPI: टीएमसी सांसदों के विलय को अभिषेक बनर्जी ने दी लोकसभा स्पीकर के सामने चुनौती; कहा- संविधान का हुआ अपमान

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के 20 सांसदों के एक अलग ग्रुप ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय के दावे को कड़ी चुनौती दी है। शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ सांसदों कल्याण बनर्जी और सौगत रॉय के साथ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और बागी सांसदों की सदस्यता तत्काल समाप्त करने की मांग की।

📜 दसवीं अनुसूची और मर्जर का तर्क

अभिषेक बनर्जी ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि केवल विधायी पार्टी (सांसदों का ग्रुप) का मर्जर मान्य नहीं होता, जब तक कि पूरी पार्टी संगठन का विलय न हो। उन्होंने कहा, “20 सांसदों ने स्वैच्छिक आधार पर पार्टी छोड़ी है, इसलिए उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त होनी चाहिए।” अभिषेक ने लोकसभा स्पीकर को 20 अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं सौंपी हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए जल्द फैसले की मांग की है।

📢 ‘दबाव और लालच के कारण हुआ दलबदल’

अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों पर हमला बोलते हुए कहा कि इन लोगों ने अपने जमीर और सम्मान को बेचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दलबदल ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के डर और करोड़ों के लालच में किया गया है। अभिषेक ने कहा, “बंगाल की जनता इस बेईमानी को माफ नहीं करेगी। उन्हें सेंट्रल सिक्योरिटी मिली है, लेकिन जनता उनके साथ खड़ी नहीं होगी।”

🏛️ लोकतांत्रिक संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप

अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र की तर्ज पर अब बंगाल में भी लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि डरा-धमकाकर राजनीतिक तोड़-फोड़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके और ममता बनर्जी के आवासों पर छापेमारी और लगातार समन भेजना इसी कड़ी का हिस्सा है ताकि विपक्षी दलों को कमजोर किया जा सके।