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केरल में अंग तस्करी की जांच जारी

प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने की कई जगह छापामारी

  • कोल्लम सिटी पुलिस ने खुलासा किया

  • मुख्य आरोपी पहले भी गिरफ्तार हुआ

  • इसके जरिए करोड़ों की कमाई का संदेह

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल के स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय ने राज्यव्यापी स्तर पर अंग तस्करी (ऑर्गन ट्रैफिकिंग) के एक बड़े रैकेट के खिलाफ व्यापक छापेमारी शुरू की। यह जांच उस कथित अवैध नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए की जा रही है, जो फर्जी दस्तावेजों, बिचौलियों और गैरकानूनी किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कर रहा था।

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को केरल के नौ अलग-अलग जिलों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और कासरगोड जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। जांच के घेरे में कोच्चि स्थित मेडिकल ट्रस्ट हॉस्पिटल और लेकशोर हॉस्पिटल जैसे बड़े अस्पताल आए हैं। इसके अलावा, उन एजेंटों और बिचौलियों के आवासों पर भी छापे मारे गए, जो इस पूरे अवैध कारोबार में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि किस तरह से अस्पताल, एजेंट और मध्यस्थ इस पूरी प्रक्रिया में कमीशन कमा रहे थे। आरोप है कि यह गिरोह जरूरतमंदों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना शिकार बनाता था। वे अंग प्रत्यारोपण के लिए डोनर (दाता) और प्राप्तकर्ता को खोजने, उनके मेडिकल स्क्रीनिंग कराने और प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमतियां हासिल करने के नाम पर बड़ी रकम वसूलते थे।

इस गिरोह का सरगना मोहम्मद नजीब (53) बताया जा रहा है, जिसे इस साल की शुरुआत में गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, नजीब की फर्म कल्लत्रास मेडिकल टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड इस पूरे रैकेट की मुख्य कड़ी थी। नजीब ने एक ऐसा नेटवर्क बनाया था जो मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम के प्रावधानों को दरकिनार करने के लिए फर्जी रिश्तेदारी प्रमाण पत्र, मेडिकल टूरिज्म रिकॉर्ड और निर्वाचित प्रतिनिधियों के फर्जी अनुशंसा पत्र तैयार करता था।

आर्थिक लेनदेन का गणित खुलासा हुआ है कि प्राप्तकर्ताओं से एक अंग प्रत्यारोपण के लिए 20 लाख रुपये तक लिए जाते थे, जबकि डोनर को केवल 5 से 10 लाख रुपये का भुगतान किया जाता था। बाकी की भारी-भरकम राशि कमीशन के रूप में बिचौलियों के बीच बंट जाती थी। यह भी संदेह है कि पिछले पांच वर्षों में इस फर्म ने लगभग 40 ऐसे अवैध प्रत्यारोपण कराए हैं।

इस मामले का खुलासा सबसे पहले कोल्लम सिटी पुलिस द्वारा की गई जांच से हुआ था। इस दौरान एजेंट श्रीजा (40) और सुधीर (31) के साथ-साथ एक डोनर विनोद को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन और फर्जी पहचान पत्र सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे। अब ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध कारोबार से अर्जित धन को वैध व्यवसायों के माध्यम से कैसे खपाया गया।