Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
AI vs Justice: अदालती फैसलों में AI का अनियंत्रित इस्तेमाल खतरनाक, सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति ब... Bombay High Court News: ‘सरकार के खिलाफ नारे लगाना निष्कासन का आधार नहीं’, हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई... Patna Bungalow Controversy: राबड़ी देवी ने खाली किया सरकारी बंगला, लालू परिवार अब कौटिल्य नगर स्थित ... Brij Bhushan Sharan Singh Case: यौन शोषण मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 3 अगस्त को ... NADA Doping Bill 2026: डोपिंग अब बनेगा गंभीर अपराध, कोच और ड्रग सप्लायर को होगी 5 साल की जेल BMC Action: खुले मैनहोल में गिरने से व्यक्ति की मौत, बीएमसी ने दी 10 लाख की सहायता; जांच के लिए समित... Ram Niwas Mandir Dispute: राम मंदिर परिसर के पास पंचायती मंदिर पर कब्जे का आरोप, ट्रस्ट के महासचिव प... Assembly By-election 2026: बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की 3 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, 30 जुलाई को ह... Delhi School Fee Rule: निजी स्कूलों को 15 जुलाई तक गठित करनी होगी फीस समिति, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ... College Street Makeover: अग्निमित्रा पॉल के प्रस्ताव का विरोध, हॉकरों की आजीविका और सौंदर्यीकरण के ब...

Bihar Politics: बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को दिया बड़ा झटका? विधान परिषद में जगह नहीं मिलने से बढ़ी सियासी सरगर्मी

पटना: एनडीए के सहयोगी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के लिए राजनीतिक स्थितियां कठिन होती जा रही हैं। हालिया घटनाक्रम में बीजेपी द्वारा उनके बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद (MLC) में नहीं भेजने के बाद, अब दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि संवैधानिक नियमों के अनुसार, बिना सदन के सदस्य बने कोई व्यक्ति छह महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन उसके बाद की स्थिति अनिश्चित है।

🤝 बीजेपी के ऑफर और अस्तित्व की जंग

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा के सामने दो शर्तें रखी थीं—या तो वे अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर लें, या फिर उनके बेटे बीजेपी के टिकट पर विधान परिषद जाएं। कुशवाहा ने अपनी पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए दोनों ही प्रस्तावों को खारिज कर दिया। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि चार विधायकों वाली पार्टी को एक राज्यसभा और एक विधान परिषद की सीट देना पार्टी के गणित में फिट नहीं बैठता है।

👨‍👦 परिवारवाद और पार्टी के भीतर विरोध

उपेंद्र कुशवाहा पर उनकी ही पार्टी के विधायकों द्वारा परिवारवाद का आरोप लगाया जा चुका है। उनके चार विधायकों में से एक उनकी पत्नी हैं और बेटे को मंत्री बनवाने से पार्टी के शेष तीन विधायक पहले ही नाराज चल रहे हैं। अब कुशवाहा अपने और बीजेपी के बीच हुए उस पुराने समझौते की दुहाई दे रहे हैं, जिसमें उन्हें विधान परिषद की एक सीट देने का वादा किया गया था।

⚡ बीजेपी का स्टैंड और भविष्य की राह

बीजेपी का मानना है कि सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाकर उन्होंने कुशवाहा समुदाय को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व दे दिया है। ऐसे में अब केवल चार विधायकों वाली पार्टी की शर्तों को मानना उनके लिए जरूरी नहीं रह गया है। हालांकि, अगले साल 12 विधान परिषद सदस्यों का मनोनयन होना है, लेकिन तब तक दीपक प्रकाश के मंत्री पद को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती है।