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Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से सोसाइटी मैनेजर को बड़ा झटका; 690 क्विंटल धान गायब होने की FIR रद्द करने से इनकार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट से सहकारिता क्षेत्र और धान खरीदी केंद्रों में होने वाली अनियमितताओं को लेकर एक बेहद बड़ा और कड़ा कानूनी फैसला सामने आया है. धान खरीदी सेंटर से रिकॉर्ड 690.70 क्विंटल धान के रहस्यमयी तरीके से गायब होने के हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी सोसाइटी प्रबंधक (मैनेजर) को माननीय उच्च न्यायालय से किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधक के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को निरस्त करने की मांग वाली आपराधिक याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब आरोपी प्रबंधक के खिलाफ पुलिसिया जांच और दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.

🌾 क्या है पूरा मामला? तय समय पर मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा धान न उठाने और फिजिकल वेरिफिकेशन में खुली पोल

पूरे मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि के अनुसार, याचिकाकर्ता अतुल वर्मा दुर्ग जिले की तहसील पाटन के अंतर्गत आने वाली ‘सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कुम्हली’ में सोसाइटी मैनेजर (प्रबंधक) के पद पर कार्यरत है. तय सरकारी नियमों और अधिकारियों के बीच हुए आधिकारिक एग्रीमेंट के मुताबिक, किसानों से खरीदे गए धान को मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा 31 मार्च 2026 को या उससे पहले उठा लिया जाना था. लेकिन, प्रबंधक का दावा है कि बार-बार लिखित और मौखिक अनुरोध करने के बावजूद, फेडरेशन द्वारा धान को समय पर नहीं उठाया गया और वह लंबे समय तक खुले आसमान के नीचे खरीद सेंटर पर ही डंप रहा. इसी के बाद जब जांच हुई, तो रिकॉर्ड में 690.70 क्विंटल धान की भारी कमी पाई गई.

📊 फिजिकल वेरिफिकेशन की जांच रिपोर्ट में मिला करोड़ों का अंतर: ₹23 लाख से अधिक की सरकारी संपत्ति के गबन का आरोप

इस बड़े वित्तीय घालमेल की आधिकारिक शिकायत कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, दुर्ग की जामगांव ब्रांच द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई थी. बैंक की रिपोर्ट में कहा गया था कि सहकारी समिति मर्यादित, कुम्हली में चालू सीजन के दौरान कुल 53,956 क्विंटल धान की खरीद की गई थी. कागजों पर पूरा स्टॉक 1 अप्रैल 2026 तक ट्रांसपोर्ट कर दिया गया था, लेकिन संदेह होने पर 23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग (Food Department) और सहकारिता विभाग के आला अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने धान खरीद सेंटर का औचक फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) किया. इस जांच में कथित तौर पर ₹21,41,170 मूल्य का 690.70 क्विंटल धान और ₹2,13,645 मूल्य के 3057 खाली बोरे गायब मिले. कुल मिलाकर निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मैनेजर पर ₹23,54,815 की सरकारी संपत्ति के गबन और गलत इस्तेमाल का सीधा आरोप तय किया गया.

🐀 ‘धान को चूहे खा गए और धूप में सूख गया’: मैनेजर अतुल वर्मा की अजीबोगरीब दलील को हाईकोर्ट ने माना बेबुनियाद

अपने खिलाफ दर्ज हुई आपराधिक एफआईआर को पूरी तरह रद्द कराने और पुलिसिया कार्रवाई पर तुरंत स्टे (रोक) लगाने की मांग को लेकर सोसाइटी मैनेजर अतुल वर्मा ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में बेहद अजीबोगरीब और हास्यास्पद दलील देते हुए कहा कि चूंकि धान लंबे समय तक खुले केंद्र में रखा था, इसलिए संग्रहित 690.70 क्विंटल धान को चूहों और कीड़ों ने खा लिया तथा भीषण गर्मी के कारण आई प्राकृतिक नमी व सूखेपन की वजह से वजन कम हो गया, जिसे रोक पाना किसी भी इंसान के बस में नहीं था. याचिका में विभागीय जांच और पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह गलत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया गया था.

⚖️ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनाया कड़ा फैसला: पुलिस को पूरी मुस्तैदी से जांच आगे बढ़ाने के आदेश

इस बेहद संवेदनशील और राजस्व से जुड़े मामले की अंतिम सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई. माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, केस डायरी का अवलोकन करने और भौतिक सत्यापन की सरकारी रिपोर्ट को देखने के बाद याचिकाकर्ता की सभी दलीलों को अप्रासंगिक मानते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया. चीफ जस्टिस की खंडपीठ के इस अहम फैसले के बाद अब सोसाइटी प्रबंधक के खिलाफ पुलिस थानों में दर्ज एफआईआर पूरी तरह प्रभावी और कानूनी रूप से वैध रहेगी, और पुलिस को निर्देशित किया गया है कि वे बिना किसी दबाव के मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द चार्जशीट कोर्ट में पेश करें.